संपादन का अर्थ है किसी सामग्री से उसकी अशुद्धियों को दूर करके उसे पढ़ने लायक बनाना। एक उप संपादक अपने रिपोर्ट की खबरों को ध्यान से पड़ता है और उसकी भाषा शैली, व्याकरण , वर्तनी तथा तथ्य संबंधी अशुद्धियों को दूर करता है। इसके बाद वह खबरों को उनके महत्व के अनुसार काटता-छातता है और उसे कितनी और कहां जगह दी जाए यह भी तय करता है। जिसके लिए वह संपादन के कुछ सिद्धांतों का पालन करता है । समाचार संगठनों में समाचारों के संकलन का कार्य रिपोर्टिंग की टीम करती है वही उन्हें संपादित कर लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संपादकीय टीम पर होती है।

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पत्रकारिता कुछ सिद्धांतों पर चलती है। एक पत्रकार से अपेक्षा की जाती है कि वह समाचार के लेखन के दौरान इनका पालन करेगा। इसका पालन करके ही एक पत्रकार, उसका समाचार संगठन, अपने पाठकों का विश्वास जीत सकता है। किसी भी समाचार संगठन की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर टिकी होती है। और यहीं पर संपादन के सिद्धांत की जरूरत पड़ती है। असल मे संपादन के सिद्धान्त संपादक के लिए एक प्रकार से रोड मैप बनाने का काम करता है।

पत्रकारिता की साख को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है:-

  • तथ्यात्मकता
  • वस्तुपरकता
  • निष्पक्षता
  • संतुलन
  • स्त्रोत
  • सत्यता
  • समसामयिकता

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