कहते हैं कि एक व्यक्ति कोई बात चार लोगों को बताए और वे चार लोग आगे और चार लोगों को बात बताएं। फिर बेशक चाहे वह बात झूठ ही क्यों न हो आगे जाकर सच का चोंगा पहन ही लेती है। ये बात आप अपने घर में भी देख सकते हैं और घर के बाहर भी… जहां अपने खुशी या मजाक के लिए लोगों किसी भी हद तक गिर जाते हैं, बिना परिणाम के परवाह के बिना।
खैर हमें क्या करना हम तो खुश हैं न सुबह-शाम खाने को मिल जा रहा है, लोग मर रहे हैं तो मेरी बला से… कौन से मेरे परिवार के लोग हैं जो मरे हैं… बस ऐसे ही एक दिन वह लोग आपके घर पर भी दस्तक देंगे और दरवाजा तोड़कर दिखा देंगे की अच्छी बात है आपने खुद कुछ नहीं किया इसलिए हमने कर दिया।
दरवाजा हमेशा अंदर से खुलता है घर में जाने के लिए पर शायद ऐसा लगता है कि इस दरवाजे कि कुंजी बाहर वालों को दे दी गई है… जो किसी को भी घर में घुंसा सकते हैं और आपके घर को तोड़ कर उसे श्मशान बना सकते हैं।
इसी क्रम में मीडिया भी पीछे नहीं दिखती… शर्म आती है कि जिस मीडिया की शुरुआत सच दिखाने के लिए हुई थी आज उनके कलम… माफ कीजिएगा आज उनका रुपया ही उनकी कलम हो गई है। कई बार तो समाचार देखते और सुनते ही दिमाग भरोसा नहीं करता की ये बड़े मीडिया चैनलों द्वारा लिखा गया कोई समाचार है।
अब बात करें कि क्या सच में हमें जमीनी स्तर की हकीकत पता है… नहीं… आज हम भेड़चाल में जी रहे हैं… हमें जो परोस दिया जाए बिना सवाल के ग्रहण कर लेंगे। हकीकत का ह भी नहीं पता हैं हमें… फिर चाहे देश की इकोनॉमी हो, आतंकवाद का मुद्दा हो या फिर अपना घर हो जहां आप पले और बड़े हुए हैं… वहीं आपको कौन खंजर मार जाए नहीं पता…
ये जिंदगी बहुत जालिम है साथी… यहां की सच्चाई असलियत से परे है… कुल मिलाकर अपने दिमाग का प्रयोग करें और उसपर रिसर्च कर… परिणाम निकालें क्योंकि खंजर आर धोखा कभी भी आपके शरीर से होकर गुजर सकता है।
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