पिछले कुछ समय से केरल में एक खतरनाक सूक्ष्मजीव की चर्चा हो रही है, जिसे आम भाषा में दिमाग खाने वाला अमीबा कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम है निग्लेरिया फाउलेरी (Naegleria Fowleri)। यह अमीबा बहुत ही दुर्लभ है लेकिन जब भी किसी इंसान को संक्रमित करता है, तो उसका परिणाम बेहद घातक होता है। मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जीव नाक के ज़रिए शरीर में प्रवेश करता है और सीधे दिमाग तक पहुँचकर गंभीर संक्रमण पैदा करता है। इस संक्रमण का नाम है प्राइमरी अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिस (PAM), जो अधिकांश मामलों में जानलेवा साबित होता है।
दिमाग खाने वाला अमीबा क्या है?
निग्लेरिया फाउलेरी एक प्रकार का अमीबा है, यानी एकल-कोशिकीय जीव। यह स्वाभाविक रूप से गर्म और गंदे पानी में पाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि यह शरीर में घुसते ही तेजी से बढ़ता है और दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है। यही वजह है कि इसे “दिमाग खाने वाला अमीबा” कहा जाता है।
दुनिया में इस संक्रमण के बहुत कम मामले सामने आते हैं, लेकिन जो भी आते हैं, उनमें मृत्यु दर लगभग 95% से अधिक होती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक मानते हैं।
यह अमीबा कहाँ पनपता है?
निग्लेरिया फाउलेरी ज़्यादातर गर्म और ठहरे हुए पानी में पनपता है।
- तालाब और झील
- बिना क्लोरीन वाला स्विमिंग पूल
- गंदा नाला या पानी का जमाव
- खराब तरह से साफ किए गए वॉटर टैंक
यह जीव खासतौर पर 25 से 46 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले पानी में तेजी से बढ़ता है। इसलिए मानसून और गर्मी के मौसम में इसके फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
संक्रमण कैसे फैलता है?
यह अमीबा खाने या पीने से सीधे पेट में जाने पर नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन समस्या तब होती है जब यह नाक के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर जाए।
- जब लोग तालाब, झील या गंदे पानी में तैरते हैं।
- जब संक्रमित पानी नाक में चला जाता है।
- वॉटर स्पोर्ट्स या स्विमिंग के दौरान पानी के छींटे नाक में घुसने से।
नाक से अंदर जाने के बाद यह जीव घ्राण तंत्रिका (Olfactory Nerve) से होते हुए सीधे दिमाग तक पहुँच जाता है और वहां तेजी से कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है।
लक्षण क्या हैं?
निग्लेरिया फाउलेरी संक्रमण के लक्षण आमतौर पर 2 से 7 दिनों के अंदर दिखने लगते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे गंभीर हो जाते हैं।
- तेज सिरदर्द
- बुखार और ठंड लगना
- मतली और उल्टी
- गर्दन में अकड़न
- रोशनी से परेशानी
- मानसिक भ्रम और चक्कर
- दौरे (seizures)
- कोमा की स्थिति
ज्यादातर मामलों में संक्रमण इतना तेज होता है कि मरीज कुछ ही दिनों में मौत के करीब पहुँच जाता है।
इलाज क्यों है मुश्किल?
डॉक्टर मानते हैं कि निग्लेरिया फाउलेरी संक्रमण का इलाज बेहद कठिन है।
- यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है और दिमाग को नुकसान पहुंचाता है।
- शुरुआती लक्षण साधारण बुखार या मैनिंजाइटिस जैसे लगते हैं, जिससे पहचानने में देर हो जाती है।
- वर्तमान में कुछ दवाइयाँ जैसे एम्फोटेरिसिन-बी (Amphotericin-B) और मिल्टेफोसिन (Miltefosine) का उपयोग किया जाता है, लेकिन ये भी हमेशा सफल नहीं होतीं।
- विश्व स्तर पर इसके संक्रमण से मरने वालों की दर बहुत अधिक है, इसलिए इसे “लगभग लाइलाज” माना जाता है।
भारत में और दुनिया में इसके मामले
- भारत में यह संक्रमण बहुत दुर्लभ है, लेकिन केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान से समय-समय पर मामले सामने आ चुके हैं।
- अमेरिका में हर साल कुछ मामले दर्ज होते हैं, खासकर गर्मियों में जब लोग तालाब और झीलों में तैरने जाते हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार अब तक दर्ज मामलों में केवल कुछ ही मरीज जीवित बच पाए हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
चूंकि इस संक्रमण का इलाज बेहद कठिन है, इसलिए सबसे अच्छा तरीका है इससे बचाव करना।
सावधानियाँ:
- हमेशा साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें।
- तालाब, झील और गंदे स्विमिंग पूल में तैरने से बचें।
- स्विमिंग करते समय नाक में पानी जाने से रोकें।
- पानी की टंकी और स्विमिंग पूल की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन करवाएं।
- बच्चों को गंदे पानी में खेलने से रोकें।
विशेषज्ञों की चेतावनी
केरल के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को बेवजह डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। यह संक्रमण आम नहीं है, लेकिन अगर एक भी मामला सामने आता है तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए।
निष्कर्ष
दिमाग खाने वाला अमीबा यानी निग्लेरिया फाउलेरी बेहद खतरनाक लेकिन दुर्लभ संक्रमण है। यह नाक के ज़रिए शरीर में घुसकर सीधे दिमाग तक पहुंचता है और गंभीर संक्रमण फैलाता है। इसका इलाज कठिन और सफलता की संभावना कम होती है, इसलिए बचाव ही सबसे बेहतर रास्ता है। साफ पानी का इस्तेमाल, स्विमिंग करते समय सावधानी और जागरूकता ही इस घातक जीव से सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।
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