pom oil

भारत में खाद्य तेलों की खपत लगातार बढ़ रही है और इसी के साथ पाम ऑयल (तेल पाम) की मांग भी तेजी से बढ़ी है। सरकार इस फसल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी दे रही है, जिससे यह कई राज्यों में किसानों के लिए ‘ATM’ साबित हो रही है। खासतौर पर उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कई राज्य पाम ऑयल उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

पाम ऑयल की खेती क्यों खास है?

  • उच्च उत्पादन क्षमता: एक हेक्टेयर तेल पाम से सालाना 4-5 टन तक तेल निकल सकता है, जो अन्य तेल वाली फसलों से कई गुना अधिक है।
  • लंबे समय तक आय: एक बार पौधारोपण के बाद पाम के पेड़ 25-30 साल तक फल देते हैं।
  • बढ़ती मांग: पाम ऑयल का इस्तेमाल खाद्य तेल, कॉस्मेटिक, साबुन और बायोडीजल में होता है, जिससे बाजार हमेशा सक्रिय रहता है।

सरकारी सब्सिडी और योजनाएं

भारत सरकार नेशनल मिशन ऑन ऑयल पाम (NMEO-OP) के तहत किसानों को प्रोत्साहन राशि, पौधे, सिंचाई और उर्वरक पर सब्सिडी दे रही है।

  • पौधारोपण पर 85% तक सब्सिडी
  • सिंचाई उपकरणों पर आर्थिक सहायता
  • तकनीकी प्रशिक्षण और मार्केट लिंकिंग

खेती का तरीका और आवश्यकताएं

  1. जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु पाम ऑयल के लिए सबसे उपयुक्त है।
  2. मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी बेहतर रहती है।
  3. पौधारोपण दूरी: 9 मीटर x 9 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएं।
  4. सिंचाई: ड्रिप सिंचाई पद्धति से पौधों को नियमित पानी दें।

कमाई का अनुमान

  • एक हेक्टेयर से 4-5 टन तेल का उत्पादन
  • बाजार भाव ₹90-₹120 प्रति किलो (गुणवत्ता पर निर्भर)
  • सालाना आय ₹4-6 लाख प्रति हेक्टेयर तक संभव
  • पौधारोपण के 3-4 साल बाद से नियमित आय शुरू हो जाती है

किन राज्यों में हो रही है पाम ऑयल की खेती?

  • उत्तर-पूर्व: असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड
  • दक्षिण भारत: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक
  • अन्य: अंडमान-निकोबार और गोवा

निष्कर्ष

पाम ऑयल की खेती किसानों के लिए लंबे समय तक नियमित और उच्च आय का जरिया है। सरकारी सब्सिडी, बढ़ती मांग और तकनीकी सहायता के साथ यह फसल आने वाले समय में भारत के कृषि क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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