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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान देहरादून स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अभियान का उद्देश्य किसानों से सीधे संवाद कर कृषि विकास की दिशा में वैज्ञानिक पहलुओं को धरातल से जोड़ना है।

श्री चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि खेत ही असली प्रयोगशाला है और किसान ही सबसे बड़े वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बताया कि देशभर में 16,000 वैज्ञानिकों की टीमों का गठन कर उन्हें गांव-गांव भेजा जा रहा है ताकि ‘लैब से भूमि’ तक की कड़ी मजबूत हो।

उत्तराखंड में 75 वैज्ञानिक टीमें कर रही संवाद

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 75 वैज्ञानिक टीमों को भेजा गया है जो विभिन्न गांवों में जाकर किसानों से जलवायु, मृदा, फसल विविधता और स्थानीय समस्याओं के संदर्भ में संवाद कर रही हैं। यह संवाद दो-तरफा है – जिसमें किसानों की समस्याएं भी सुनी जा रही हैं और वैज्ञानिक समाधान भी दिए जा रहे हैं।

फसल को जंगली जानवरों से सुरक्षा: विशेष प्राथमिकता

उत्तराखंड के किसानों ने फसलों को जानवरों से बचाने के लिए बाड़बंदी की मांग की, जिस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी।

फल व सब्जियों की गुणवत्ता में उत्तराखंड अग्रणी

मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड की पहाड़ियाँ चमत्कारों से भरी हैं। यहां की फल-सब्जियों की गुणवत्ता देशभर में अग्रणी है। उन्होंने उत्तराखंड के सेबों की तुलना कश्मीर से करते हुए बताया कि यह प्रतियोगिता का संकेत है। स्थानीय फल काफल (Myrica esculenta) की वैश्विक मांग में भी वृद्धि हो रही है।

मोटे अनाज व जैविक खेती पर ज़ोर

श्री चौहान ने कहा कि उत्तराखंड में उत्पादित पारंपरिक अनाज जैसे मंडुवा (रागी) बहुत उच्च गुणवत्ता के हैं। इनकी पैदावार, बीज सुधार, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में जैविक खेती पहले से हो रही है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

उर्वरक का संतुलित प्रयोग एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड

किसानों को सलाह दी गई कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के अनुसार कीटनाशकों का प्रयोग करें ताकि लागत कम हो और गुणवत्ता बनी रहे।

कार्यक्रम में अन्य प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति

इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कृषि मंत्री गणेश जोशी, कृषि सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडे, निदेशक रणवीर सिंह चौहान, गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान और ICAR-IVRI के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त जैसे प्रमुख वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

विकसित कृषि संकल्प अभियान न केवल वैज्ञानिक और किसान के बीच की खाई को पाट रहा है, बल्कि भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्व की ओर भी ले जा रहा है। उत्तराखंड के किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जो खेती को नया आयाम दे सकती है।

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