प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया। इस योजना का मूल उद्देश्य कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ना और जल उपयोग की दक्षता को बढ़ाना है। योजना का नारा है – “हर खेत को पानी”, जो दर्शाता है कि देश का प्रत्येक किसान अपनी फसल के लिए पर्याप्त जल सुविधा पा सके।
PMKSY को विभिन्न मंत्रालयों की समन्वित योजना के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें प्रमुख चार घटक शामिल हैं:
- जल स्रोत विकास (AIBP): जलाशयों, बांधों, नहरों आदि का निर्माण और विस्तार।
- हर खेत को पानी: माइक्रो सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) के माध्यम से खेत तक जल पहुँचाना।
- जल संचयन और प्रबंधन: वर्षा जल संग्रहण, खेत तालाब और जल संरक्षण के उपाय।
- जल उपयोग की दक्षता: “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के तहत जल का अधिकतम उपयोग।
लाभ और उपलब्धियाँ
- जल की बर्बादी को रोकने में मदद
- छोटे और सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध
- कृषि उत्पादन में वृद्धि
- सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में राहत
- ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों का प्रसार
माइक्रो सिंचाई के लिए विशेष प्रोत्साहन
PMKSY के तहत माइक्रो सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे किसान कम पानी में ज्यादा उपज पा रहे हैं। “Per Drop More Crop” अवधारणा के तहत फलों, सब्जियों, गन्ना, कपास जैसे फसलों में ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना का कार्यान्वयन
यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जाती है। प्रत्येक जिले में “जिला सिंचाई योजना” बनाई जाती है ताकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार सिंचाई सुविधा विकसित की जा सके।
किसानों की भूमिका और प्रशिक्षण
PMKSY के तहत किसानों को प्रशिक्षण, डेमो परियोजनाएं, जागरूकता अभियान के माध्यम से नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लक्ष्य है कि 2030 तक देश की 100% कृषि भूमि को सिंचाई के तहत लाया जाए। जल संरक्षण, हरियाली और उत्पादनवर्धन इस योजना की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं।
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