केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के नास्क परिसर, पूसा स्थित डॉ. सी. सुब्रमणियम सभागार में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाना और किसानों को सशक्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को “धरती के देवता” कहा और बताया कि उन्हें सम्मान देना हमारा दायित्व है।
विज्ञान आधारित कृषि परिवर्तन और पारंपरिक पद्धतियों का समन्वय
श्री चौहान ने इस सम्मेलन में विज्ञान आधारित कृषि सुधारों की आवश्यकता को दोहराया, साथ ही यह भी कहा कि पारंपरिक खेती को जोड़ना भी आज के समय की मांग है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आजीविका को बेहतर बनाना है।
मंत्रालय की छह सूत्रीय रणनीति
उन्होंने मंत्रालय की 6 प्रमुख रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं:
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- उत्पादन लागत में कमी
- फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना
- प्राकृतिक आपदाओं में क्षति की भरपाई
- कृषि विविधीकरण को बढ़ावा
- मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण का विकास
उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की बात कही।
“एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम” का मंत्र
श्री चौहान ने कहा कि “हम एक टीम हैं और हमारा मंत्र होना चाहिए – एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम”। उन्होंने घोषणा की कि वे 25–26 मई को पदयात्रा करेंगे ताकि किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर सकें और उनकी समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझ सकें।
खाद्य सुरक्षा और वैश्विक खाद्य टोकरी बनने का लक्ष्य
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य है:
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
- राष्ट्रीय खाद्य भंडार को भरना
- भारत को विश्व की खाद्य टोकरी बनाना
अन्य वक्ताओं के विचार
कृषि राज्य मंत्री श्री भगीरथ चौधरी ने कहा कि कृषि देश की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसान सशक्त नहीं होंगे, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने और नवाचार आधारित कृषि की आवश्यकता पर बल दिया।
ICAR के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जात ने कहा कि यह सम्मेलन कृषि, अनुसंधान और शिक्षा की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने ICAR को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा और अनुसंधान प्रणाली में “बड़े भाई” की भूमिका निभाने की आवश्यकता जताई।
ICAR के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. आर.सी. अग्रवाल ने स्वागत भाषण में सम्मेलन के उद्देश्यों को प्रस्तुत किया। श्री संजय गर्ग, अतिरिक्त सचिव (DARE) ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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