खरीफ फसलें जैसे धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली आदि वर्षा ऋतु में बोई जाती हैं। इनकी अच्छी उपज पाने के लिए बीज शोधन और नर्सरी की तैयारी अत्यंत आवश्यक होती है। यदि बीजों को सही प्रकार से उपचारित किया जाए और नर्सरी को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाए तो पौधे रोगमुक्त, मजबूत और अधिक उत्पादन देने वाले बनते हैं। इस लेख में हम जानेंगे खरीफ फसलों के बीज शोधन के तरीके और नर्सरी तैयार करने की वैज्ञानिक विधि।
बीज शोधन क्यों आवश्यक है?
बीमारियों से बचाव
बीज शोधन का प्रमुख उद्देश्य बीज जनित रोगों जैसे जड़ सड़न, झुलसा, अंकुरण विफलता आदि से बचाना है। इसके जरिए फसल की शुरुआत से ही रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
अंकुरण दर में सुधार
उपचारित बीजों से अंकुरण अधिक और समान होता है, जिससे पौधों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होती है।
बीज शोधन के मुख्य तरीके
(क) भौतिक शोधन
इसमें बीजों को साफ-सुथरा किया जाता है और टूटे, सिकुड़े या रोगग्रस्त बीजों को अलग किया जाता है। बीजों को 10% नमक घोल में डालने से हल्के व खराब बीज ऊपर तैर जाते हैं, जिन्हें निकाल देना चाहिए।
(ख) रासायनिक शोधन
रोगों की रोकथाम के लिए बीजों को फफूंदनाशक जैसे कार्बेन्डाजिम, थायरम या मैनकोजेब से उपचारित किया जाता है। 1 किलो बीज पर 2-3 ग्राम दवा का प्रयोग किया जा सकता है।
(ग) जैविक शोधन
जैविक कवकनाशक जैसे ट्राइकोडर्मा या नीम खली से भी बीजों को उपचारित किया जा सकता है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं।
खरीफ फसलों की नर्सरी कैसे तैयार करें
स्थान का चुनाव
- नर्सरी के लिए ऐसी जगह चुनें जो जल निकासी वाली हो और जहां सिंचाई की उचित व्यवस्था हो।
भूमि की तैयारी
- खेत को अच्छी तरह से जोतें और पाटा लगाएं।
- गोबर की सड़ी हुई खाद और वर्मी कम्पोस्ट डालें।
- भूमि को समतल कर छोटे-छोटे बेड बनाएं।
बीज बुवाई और देखभाल
- उपचारित बीजों को अंकुरण के बाद नर्सरी में समान रूप से फैलाएं।
- मिट्टी की हल्की परत से ढंकें और हल्की सिंचाई करें।
- खरपतवार और कीटों से बचाव के लिए जैविक विधियों का प्रयोग करें।
सावधानियाँ और सुझाव
- नर्सरी में पानी का ठहराव न होने दें।
- समय-समय पर निराई और गुड़ाई करते रहें।
- पौधों में रोग या कीट दिखाई दें तो तुरंत उपचार करें।
- नर्सरी से पौधों की रोपाई 20-25 दिन में करें।
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