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भारत में कृषि मौसम के अनुसार फसलें बोई जाती हैं, और मई का महीना खरीफ सीजन की शुरुआत का समय होता है। इस समय तापमान अधिक होता है और मानसून आने की तैयारी होती है। ऐसे में सही फसलों का चुनाव, उचित बीज दर और वैज्ञानिक खेती के उपाय अपनाकर अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है। इस लेख में हम जानेंगे मई में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें, उनके बीज की मात्रा तथा अधिक उत्पादन पाने के लिए जरूरी सुझाव।

मई में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें

(क) मूंगफली (Groundnut)

  • प्रजातियाँ: TG-37A, JL-24, GG-20
  • बीज दर: 80-100 किलो प्रति एकड़
  • विशेष: हल्की और भुरभुरी मिट्टी में अच्छी उपज देती है, नमी बनाए रखें।

(ख) मक्का (Maize)

  • प्रजातियाँ: Ganga-11, Deccan Hybrid, HQPM-1
  • बीज दर: 8-10 किलो प्रति एकड़
  • विशेष: उचित दूरी और समय पर सिंचाई से दाना भराव अच्छा होता है।

(ग) बाजरा (Pearl Millet)

  • प्रजातियाँ: ICMH 356, HHB-67, 9444
  • बीज दर: 2-3 किलो प्रति एकड़
  • विशेष: सूखा सहनशील फसल है, वर्षा पर आधारित क्षेत्रों में लाभदायक।

(घ) सोयाबीन (Soybean)

  • प्रजातियाँ: JS-335, NRC-37, MAUS-71
  • बीज दर: 30-35 किलो प्रति एकड़
  • विशेष: गहरी जुताई और अच्छी जल निकासी आवश्यक है।

(ङ) तिल (Sesame)

  • प्रजातियाँ: TKG-22, RT-351, Gujarat Til-1
  • बीज दर: 3-4 किलो प्रति एकड़
  • विशेष: कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त, कम लागत में ज्यादा लाभ।

अधिक पैदावार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • उन्नत बीजों का प्रयोग: प्रमाणित और रोगमुक्त बीजों का ही उपयोग करें। बीज शोधन से अंकुरण बेहतर होता है और रोग का खतरा कम होता है।
  • सही बीज दर और दूरी: फसलों के अनुसार उचित बीज मात्रा और पौधों के बीच दूरी बनाए रखें, जिससे पौधों को पोषण और सूर्यप्रकाश पूरा मिल सके।
  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन: मिट्टी परीक्षण के आधार पर जैविक और रासायनिक उर्वरकों का संतुलन बनाकर प्रयोग करें। जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, और नाइट्रोजन-फास्फोरस-पोटाश का संतुलित प्रयोग करें।
  • सिंचाई और जल प्रबंधन: मई की गर्मी में समय पर सिंचाई बेहद जरूरी है। फसलों के अनुसार ड्रिप या फव्वारा सिंचाई प्रणाली उपयोग करें।
  • कीट और रोग नियंत्रण: फसलों की नियमित निगरानी करें। जैविक या आवश्यक रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग समय पर करें।

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