मूंगफली, जिसे आमतौर पर “जमीन में पैदा होने वाला सोना” भी कहा जाता है, एक प्रमुख तिलहनी फसल है। भारत में मूंगफली की खेती विशेष रूप से गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में की जाती है। यह खरीफ और कहीं-कहीं रबी मौसम में भी बोई जाती है। यदि किसान सही तकनीक और आधुनिक विधियों से मूंगफली की खेती करें, तो इससे अच्छी पैदावार के साथ बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है।
मूंगफली की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और भूमि
जलवायु
मूंगफली गर्म जलवायु की फसल है और इसके लिए 25°C से 35°C तापमान उपयुक्त होता है। इसे पर्याप्त धूप और बारिश की आवश्यकता होती है, लेकिन जलभराव से फसल को नुकसान पहुंचता है।
भूमि
रेतीली दोमट या हल्की मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, मूंगफली के लिए सबसे बेहतर होती है। पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
मूंगफली की प्रमुख किस्में और बीज दर
प्रमुख किस्में
- TG-37A: जल्दी पकने वाली किस्म, सूखा सहनशील।
- JL-24: मध्यम अवधि वाली, अच्छी उपज देती है।
- GG-20: उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म।
बीज की मात्रा
- रोपण के लिए बीज दर: 80 से 100 किलो प्रति एकड़ (पॉड साइज और किस्म के अनुसार)
- बीज शोधन: बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा या थायरम जैसे फफूंदनाशकों से उपचारित करें।
खेती की विधि और बुवाई का समय
बुवाई का समय
- खरीफ मौसम: जून के मध्य से जुलाई तक
- रबी मौसम (कुछ क्षेत्रों में): अक्टूबर से नवंबर
बुवाई की विधि
- कतार से बुवाई करें, जिससे निराई, गुड़ाई और कीट नियंत्रण आसान हो।
- कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेमी रखें।
उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था
उर्वरक प्रबंधन
- 1 एकड़ में 8-10 टन गोबर की खाद डालें।
- रासायनिक खादों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलन आवश्यक है।
- 20:40:40 (N:P:K) अनुपात में खाद डालें।
सिंचाई
- खरीफ मूंगफली में बारिश पर निर्भरता होती है, लेकिन वर्षा की कमी पर सिंचाई जरूरी है।
- फूल आने और दाना भरने की अवस्था में सिंचाई से उपज में वृद्धि होती है।
रोग, कीट नियंत्रण और फसल कटाई
रोग और कीट नियंत्रण
- प्रमुख रोग: पत्तियों का झुलसा, जड़ सड़न, तना गलन
- नियंत्रण के लिए जैविक उपायों के साथ उचित रासायनिक दवाएं समय पर प्रयोग करें।
कटाई और भंडारण
- जब पौधों की पत्तियां पीली हो जाएं और फली कठोर हो जाए, तब कटाई करें।
- कटाई के बाद मूंगफली को अच्छे से सुखाकर भंडारण करें।
अधिक पैदावार और लाभ के उपाय
- प्रमाणित बीजों का प्रयोग करें।
- समय पर बुवाई और खरपतवार नियंत्रण करें।
- जैविक खाद व सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करें।
- बाजार मांग के अनुसार किस्मों का चयन करें।
- किसानों को मंडी के बजाय सीधे प्रोसेसर से संपर्क कर ज्यादा मूल्य मिल सकता है।
Read More
- Kisan ki Baat: खरीफ फसलों के लिए बीज शोधन कैसे करें?
- Kheti ki Baat: मई में बोई जाने वाली फसलें, बीज की मात्रा और अधिक पैदावार के उपाय
- Labour Day: मज़दूर और कॉरपोरेट मज़दूर, आधुनिक भारत में श्रम की नई पहचान
- Labor Day and Farmers: खेत के असली श्रमिक की पहचान और अधिकार
- New Delhi: जाति जनगणना बनाम पहलगाम, देश की प्राथमिकता क्या है?
Discover more from अपना रण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


Very nice
Nice information