Mandi Mafia’s fraud: देश के किसान वर्षों से अपनी मेहनत के बदले उचित मूल्य पाने की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन मंडियों में फैले भ्रष्टाचार और मंडी माफिया की मिलीभगत ने उनकी स्थिति को बद से बदतर बना दिया है। हाल ही में हरियाणा में सामने आए एक बड़े फर्जीवाड़े ने मंडी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
गेहूं खरीद के दौरान राज्य की 42 अनाज मंडियों में जब औचक निरीक्षण किया गया तो तौल मशीनों में छेड़छाड़, फर्जी पर्ची जारी करने और किसानों के उत्पादन का वजन कम दर्शाकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले उजागर हुए। (Mandi Mafia’s fraud)
मुख्यमंत्री नायब सैनी के निर्देश पर CID और फ्लाइंग स्क्वॉड ने छापेमारी कर 62 दुकानदारों पर करीब 45 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि मंडियों में किसानों का शोषण किस हद तक जड़ें जमा चुका है।
सरकारी खरीद के बाद किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं आढ़ती (Mandi Mafia’s fraud)
भारत सरकार हर साल गेहूं, धान समेत 24 प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है और तय समयसीमा के भीतर फसल की सरकारी खरीद की जाती है। परंतु जो किसान इस सीमित अवधि में अपनी उपज नहीं बेच पाते, उन्हें मजबूरी में निजी आढ़तियों और बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ता है।
सरकारी तंत्र से बाहर आते ही किसानों के साथ तौल में गड़बड़ी, फर्जी पर्ची जारी कर भुगतान में कटौती और मनमानी दरें थोपने का सिलसिला शुरू हो जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, तौल और भुगतान में गड़बड़ी से किसानों को हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जबकि मंडी तंत्र में अन्य स्तरों पर होने वाली धोखाधड़ी से कुल नुकसान 15,000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंचता है। (Mandi Mafia’s fraud)
बुवाई से पहले ही फंस जाते हैं किसान आढ़तियों के जाल में
किसान जब बुवाई के समय पूंजी की कमी से जूझते हैं, तब आढ़ती उन्हें पर्ची देकर बीज, खाद और कीटनाशक महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर कर देते हैं। किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है और जब उसकी फसल तैयार होती है, तब वही आढ़ती अपने मनमाने नियम थोपकर उपज खरीदते हैं। (Mandi Mafia’s fraud)
तौल मशीनों में हेरफेर कर कम वजन दिखाया जाता है, उपज का मूल्य मनचाहा तय कर दिया जाता है और किसान को उसकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे किसान आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो जाता है कि अगली फसल के लिए फिर से आढ़ती के कर्ज पर निर्भर हो जाता है। यह चक्रव्यूह पीढ़ियों से किसानों को जकड़े हुए है।
मंडी सुधारों की जरूरत: पारदर्शिता और डिजिटल तंत्र समय की मांग
किसान नेताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि मंडी तंत्र में सुधार लाना अब टालने योग्य नहीं रहा। किसान नेता गुणी प्रसाद का सुझाव है कि मंडियों में तौल प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए ताकि वजन में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे। मंडी में होने वाले हर लेनदेन को रीयल टाइम ट्रैक किया जाए। (Mandi Mafia’s fraud)
साथ ही मंडी फर्जीवाड़े में लिप्त पाए जाने वाले आढ़तियों और कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। किसानों को सीधी सरकारी खरीद के लिए समयसीमा बढ़ाई जाए, सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त किया जाए ताकि किसान सीधे अपनी फसल बेच सकें। (Mandi Mafia’s fraud)
बीज, खाद और ऋण की आपूर्ति भी सरकारी या सहकारी संस्थाओं के माध्यम से करवाई जाए, ताकि किसान आढ़तियों के चंगुल से आजाद हो सकें।
किसान सशक्त होंगे तो देश मजबूत बनेगा
जब तक मंडियों में पारदर्शिता और किसानों को निष्पक्ष लेनदेन की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक किसानों की आय दोगुनी करने जैसे लक्ष्य सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे। मंडी माफिया का जाल तोड़ने और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने के लिए सरकार को गंभीर और ठोस कदम उठाने होंगे। (Mandi Mafia’s fraud)
यह सिर्फ किसानों के हित की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश के आर्थिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय का सवाल है। अगर हम सच में भारत को कृषि महाशक्ति बनते देखना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने किसानों को मंडियों के शोषण से मुक्त कराना होगा।
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