Increasing demand for water: दुनियाभर में खाद्य उत्पादन बढ़ाने की होड़ में हम जिस संसाधन का सबसे अधिक दोहन कर रहे हैं, वह है “पानी”। हाल ही में नीदरलैंड्स के ट्वेंटे विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक रिसर्च से सामने आया है कि फसलों के लिए पानी की खपत 1990 से लेकर 2019 के बीच 30% तक बढ़ चुकी है, जो न केवल जल संकट बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन को भी जन्म दे रही है।
पानी की खपत बढ़ने के पीछे की वजहें (Increasing demand for water)
1. वैश्वीकरण और आर्थिक विकास
बढ़ते व्यापार और फसलों के वैश्विक आदान-प्रदान ने उत्पादन और खपत को बढ़ाया, जिससे पानी की मांग भी तेज़ी से बढ़ी।
2. आहार में बदलाव
अब लोग ऐसे उत्पाद ज्यादा खा रहे हैं जिनकी खेती में भारी मात्रा में पानी लगता है, जैसे– मीट, वसायुक्त खाद्य, मीठे पेय।
3. जैव ईंधन का उत्पादन
बायोफ्यूल बनाने के लिए फसलें उगाई जाती हैं, जो पानी के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
हरी और नीली जल खपत क्या है?
- हरा पानी: वर्षा जल जो मिट्टी में मौजूद रहता है
- नीला पानी: भूजल या सतही जल जो सिंचाई में उपयोग होता है
इन दोनों का संतुलन बिगड़ने से पारिस्थितिकी और समाज दोनों प्रभावित होते हैं। (Increasing demand for water)
रिसर्च के आंकड़े क्या कहते हैं?
- 1990 के बाद से कुल जल खपत में 1.55 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर की वृद्धि
- 2019 में फसलों ने 6.8 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर हरे पानी का उपयोग किया
- यह प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 लीटर पानी के बराबर है
सबसे ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वाले देश
- भारत
- चीन
- संयुक्त राज्य अमेरिका
इन देशों में पानी का उपयोग कृषि में अत्यधिक हो रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है। (Increasing demand for water)
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों पर असर
- जंगलों की कटाई, जैव विविधता में गिरावट, और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं
- तेल ताड़ (पाम ऑयल), सोयाबीन, गन्ना जैसी फसलों की खेती बढ़ी
- कॉरपोरेट निवेश से पर्यावरणीय असंतुलन भी बढ़ा
क्या हैं समाधान? (Increasing demand for water)
1. जल बचत वाली खेती को अपनाना
- सूखा-सहनीय फसलें जैसे बाजरा, ज्वार, चना
- टपक (drip) और फव्वारा (sprinkler) सिंचाई तकनीक
2. जैव ईंधन उत्पादन पर पुनर्विचार
- अधिक पानी खपत वाली फसलों की जगह सस्टेनेबल विकल्प चुनें
3. पानी की खपत का विवेकपूर्ण प्रबंधन
- जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सिंचाई दक्षता में सुधार
निष्कर्ष:
भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए पानी का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। यदि हमने अब भी इस जल संकट को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले वर्षों में खेती तो होगी लेकिन पानी नहीं बचेगा। शोधकर्ताओं की चेतावनी स्पष्ट है — पानी बचाओ, तभी अन्न उगाओ। यही समय है जब हमें कृषि नीति, उपभोग की आदतों और जल संसाधन प्रबंधन में स्थायी बदलाव लाना होगा। (Increasing demand for water)
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