maharana sanga

Maharana Sanga: भारत के इतिहास में कुछ युद्ध ऐसे हुए हैं, जिन्होंने देश के भाग्य को नई दिशा दी। पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ईस्वी) ऐसा ही एक महत्वपूर्ण युद्ध था, जिसमें बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी।

हालांकि बाबर का भारत आगमन महज पानीपत के युद्ध का परिणाम नहीं था। इसकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियां अधिक जटिल थीं। इस संदर्भ में मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। क्या वास्तव में महाराणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था?(Maharana Sanga)

बाबर कौन था और भारत क्यों आया?

बाबर मध्य एशिया के फरगाना क्षेत्र में पैदा हुआ, तैमूर लंग और चंगेज खान का वंशज था। फरगाना और समरकंद में कई युद्धों के बाद उसे वहां से निर्वासित होना पड़ा। अपनी मातृभूमि में सत्ता खोने के बाद बाबर ने काबुल की ओर रुख किया, जहां उसने करीब दो दशक बिताए। आखिरकार भारत की समृद्धि ने उसे आकर्षित किया, और उसने यहां साम्राज्य स्थापना का सपना देखा।

महाराणा सांगा(Maharana Sanga): एक परिचय

महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) मेवाड़ के सिसोदिया वंश के शासक थे, जिनका जन्म 12 अप्रैल 1482 को हुआ। 1509 ईस्वी में पिता राणा रायमल के निधन के बाद वे मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। राणा सांगा एक अद्भुत योद्धा थे, जिन्होंने अनेक युद्ध लड़े और अपने शासनकाल में मेवाड़ की प्रतिष्ठा को बहुत ऊंचाई तक पहुंचाया।

पानीपत का युद्ध और राणा सांगा(Maharana Sanga) की भूमिका

1526 में बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को पानीपत की लड़ाई में पराजित किया। यह युद्ध जीतने के बाद बाबर का रास्ता साफ था, लेकिन अब उसका सामना एक नए और शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी, महाराणा सांगा से होने वाला था। इब्राहिम लोदी को बाबर द्वारा हराए जाने के बाद अफगान सरदारों ने महाराणा सांगा की शरण ली।

सांगा(Maharana Sanga) और अफगानों के गठबंधन ने बाबर के लिए खतरा पैदा कर दिया था। फरवरी 1527 में राणा सांगा (Maharana Sanga) ने बाबर की सेना को बयाना युद्ध में परास्त कर दिया, जिससे बाबर चिंतित हो उठा।

खानवा का युद्ध: इतिहास बदलने वाला संघर्ष

16 मार्च 1527 को भरतपुर के खानवा में बाबर और महाराणा सांगा(Maharana Sanga) की सेनाओं के बीच निर्णायक युद्ध हुआ। शुरुआत में राणा सांगा के नेतृत्व में राजपूत सेना बाबर की सेना पर भारी पड़ रही थी, लेकिन युद्ध के बीच एक तीर महाराणा सांगा(Maharana Sanga) की आंख में लगा। इससे उनकी सेना का मनोबल गिर गया, और युद्ध का रुख बाबर की ओर मुड़ गया।

राजपूत हार गए और इस युद्ध ने भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना के लिए निर्णायक भूमिका निभाई। बाद में, कुछ सरदारों ने सांगा को जहर दिया और 30 जनवरी 1528 को उनकी मृत्यु हो गई।

क्या राणा सांगा ने बाबर को निमंत्रण दिया था?

अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या महाराणा सांगा(Maharana Sanga) ने बाबर को भारत बुलाया था? इतिहास के कई स्रोतों के अनुसार, बाबर ने ही राणा सांगा से मदद मांगी थी, न कि सांगा ने उसे निमंत्रण दिया था। दरअसल, बाबर ने इब्राहिम लोदी के खिलाफ सांगा के साथ मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रस्ताव भेजा था। शुरुआत में सांगा इसके लिए तैयार भी थे, लेकिन मेवाड़ दरबार में हुए विरोध के कारण उन्होंने बाबर के साथ गठबंधन का विचार त्याग दिया था।

बाबर को भारत आने का वास्तविक निमंत्रण

1523 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने बाबर को भारत बुलाया था। इनमें सुल्तान सिकंदर लोदी का भाई आलम खान लोदी, पंजाब का तत्कालीन गवर्नर दौलत खान लोदी और इब्राहिम लोदी के चाचा अलाउद्दीन लोदी शामिल थे। इन सभी का उद्देश्य इब्राहिम लोदी को सत्ता से हटाकर अपने स्वार्थ साधना था।

बाबरनामा का उल्लेख

बाबरनामा में राणा सांगा के एक पत्र का जिक्र है, लेकिन वह पानीपत युद्ध के बाद लिखा गया था, जिसमें बाबर के विरुद्ध युद्ध की चेतावनी थी। इससे यह साफ होता है कि सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई निमंत्रण नहीं दिया था, बल्कि बाबर ने अपनी योजनाओं को सफल बनाने के लिए सांगा के साथ समझौते का प्रयास किया था।

निष्कर्ष

इतिहास की गहन पड़ताल से स्पष्ट है कि महाराणा सांगा ने बाबर को भारत बुलाने का कोई निमंत्रण नहीं भेजा था। बाबर को भारत आने का वास्तविक निमंत्रण दिल्ली सल्तनत के असंतुष्ट सरदारों और लोदी वंश के विद्रोही सदस्यों ने भेजा था। इस प्रकार महाराणा सांगा का नाम बाबर को भारत बुलाने वालों की सूची में रखना गलत और ऐतिहासिक तथ्यों से परे है।

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By Admin

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