Somnath Temple: गुजरात का प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर इतिहास में न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए, बल्कि बार-बार हुए आक्रमणों और पुनर्निर्माण की वजह से भी जाना जाता है।
हाल ही में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने सोमनाथ के शिवलिंग से जुड़ा एक चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने इस मंदिर के इतिहास पर पुनः चर्चा छेड़ दी है।
श्रीश्री रविशंकर का दावा(Somnath Temple)
श्रीश्री रविशंकर ने दावा किया है कि उन्हें सोमनाथ मंदिर(Somnath Temple) के प्राचीन शिवलिंग के कुछ अवशेष मिले हैं, जिन्हें लगभग एक हजार साल पहले मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ा गया था। उनके अनुसार, शिवलिंग के ये अवशेष दक्षिण भारत के एक अग्निहोत्री परिवार द्वारा सुरक्षित रखे गए थे, जो अब सामने लाए गए हैं।
सोमनाथ मंदिर पर पहला बड़ा आक्रमण: महमूद गजनवी
सोमनाथ मंदिर(Somnath Temple) पर पहला बड़ा हमला तुर्क आक्रमणकारी महमूद गजनवी द्वारा साल 1026 में किया गया। गजनवी, जिसने अपनी क्रूरता और लूटपाट के लिए इतिहास में जगह बनाई, उसने मंदिर पर आक्रमण कर भारी लूटपाट की। गिर सोमनाथ जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस हमले में गजनवी ने मंदिर के शिवलिंग को तोड़ा और लगभग 20 मिलियन दीनार का धन लूट लिया।
पुनर्निर्माण: कुमारपाल का योगदान
गजनवी के इस आक्रमण के बाद मंदिरSomnath Temple) लगभग ध्वस्त हो चुका था। लेकिन इसके बाद गुजरात के राजा कुमारपाल (शासनकाल 1143-1172) ने मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया। 1169 के एक शिलालेख के अनुसार, उनके काल में मंदिर पुनः धार्मिक और आर्थिक समृद्धि की स्थिति में पहुंचा।
दूसरा आक्रमण: अलाउद्दीन खिलजी का कहर
गजनवी के आक्रमण के लगभग दो शताब्दियों बाद, 1299 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति उलुग खान के नेतृत्व में गुजरात पर आक्रमण किया। इस हमले में वाघेला वंश के राजा कर्ण को परास्त किया गया और सोमनाथ मंदिर(Somnath Temple) को पुनः लूटा गया।
पुनर्निर्माण: महिपाल प्रथम का योगदान
1308 में, सौराष्ट्र के चुडासमा राजा महिपाल प्रथम ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उनके पुत्र खेंगारा ने मंदिर में पुनः शिवलिंग की स्थापना की, जिससे मंदिर एक बार फिर अपने पुराने वैभव को प्राप्त करने में सफल रहा।
तीसरा आक्रमण: ज़फर खान की क्रूरता
मंदिर की शांति और समृद्धि अधिक दिनों तक टिक नहीं पाई। साल 1395 में गुजरात सल्तनत के संस्थापक ज़फर खान ने, जो उस समय दिल्ली सल्तनत के गुजरात क्षेत्र के गवर्नर थे, तीसरा आक्रमण किया। इस हमले में भी मंदिर को काफी क्षति पहुंचाई गई और उसकी भव्यता को नष्ट किया गया।
स्वतंत्र भारत में मंदिर का पुनर्निर्माण(Somnath Temple)
भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया। 12 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ की यात्रा के दौरान उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया। इस उद्देश्य से सोमनाथ ट्रस्ट की स्थापना की गई, जिसने धन संग्रह और मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी ली।(Somnath Temple)
आधुनिक मंदिर का उद्घाटन
मंदिर के नवीन स्वरूप का निर्माण पारंपरिक सोमपुरी शिल्पकारों द्वारा किया गया। 11 मई, 1951 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का उद्घाटन किया। यह उद्घाटन समारोह भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण था।
मंदिर की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है। भारत के प्रधानमंत्री इसके ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की वर्तमान संरचना उस धैर्य, भक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है जो बार-बार विनाश के बाद भी मंदिर को पुनः स्थापित करता रहा।
निष्कर्ष
सोमनाथ मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व के साथ-साथ विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृढ़ता का प्रतीक है।
महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी और ज़फर खान जैसे आक्रमणकारियों द्वारा मंदिर पर किए गए आक्रमणों ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया, लेकिन प्रत्येक विनाश के बाद भारत के राजाओं और भक्तों की अटूट श्रद्धा और संकल्प ने इसे फिर से जीवित कर दिया। यह मंदिर भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और निरंतर पुनर्निर्माण की भावना का जीवंत उदाहरण है।
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