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Mahaan Vyakti: इंसान महान व्यक्ति तब ही बन सकता है जब वह समस्याओं से दो-दो हाथ करके उसमें विजयी पाए। यदि आप सोचते हैं कि आप परिशानियों से दूर रहकर बच सकते हैं तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल है क्योंकि परेशानियों से डरने वाले व्यक्ति की तरक्की एक समय के बाद रुक जाती है। आइए एक कहानी के माध्यम से इसे समझते हैं…

एक समय की बात है, एक कवि ने राजा को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपके शत्रु चिरंजीवी हो, ये सुनकर राजा क्रोधित हो गया। लेकिन अपने क्रोध को राजा ने रोकते हुए कवि से पूछा कि उन्होंने ऐसा वरदान उनके दुश्मन को क्यों दिया, जिसपर कवि ने सरल शब्दों में कहा कि अगर शत्रु जीवित रहेंगे तो हम भी सावधान और पराक्रमी बने रहेंगे। पढ़िए पूरी लोक कथा…

Mahaan Vyakti वह हो जो हमेशा रहे सचेत

पुरानी लोक कथा के अनुसार एक राजा के दरबार में राज कवि निवास करते थे। राजा उनका बहुत सम्मान करता था। एक दिन राजा दरबार में बैठे हुए थे, तभी राज कवि का आगमन हुआ। राजा ने खड़े होकर अभिवादन किया तो राज कवि ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपके शत्रु चिरंजीवी हो।

ये सुनते ही राजा और पूरा दरबार आश्चर्यचकित हो गया। राजा भी कवि से नाराज हो गए, लेकिन उन्होंने अपने क्रोध को शांत कर लिया। राजा के कुछ मंत्री राज कवि से जलते थे, उन्होंने सोचा कि राजा अब तो इस कवि को दरबार से बाहर निकाल देंगे।
राज कवि भी सभी के मन की बात समझ गए और उन्होंने कहा कि महाराज मुझे क्षमा करें, मैंने आपको कुछ दिया है, पर आपने उसे स्वीकार नहीं किया है।

ये बात सुनकर राजा ने हैरान होते हुए पूछा कि आपने मुझे कौन सी चीज दी है? कवि ने कहा कि राजन् मैंने आपको आशीर्वाद दिया है, लेकिन आपने स्वीकार नहीं किया।

राजा ने कहा कि मैं ये आशीर्वाद कैसे ले सकता हूं, आप मेरे शत्रुओं को शुभकामनाएं दे रहे हैं। कवि ने राजा को समझाते हुए कहा कि राजन मेरे इस आशीर्वाद से आपका ही भला होगा। आपके शत्रु जीवित रहेंगे तो आप में बल, बुद्धि, पराक्रम और सावधानी बनी रहेगी।

शत्रुओं से निपटने के लिए आप हर पल तैयार रहेंगे। जब तक शत्रु का भय रहेगा, आप सचेत रहेंगे। शत्रुओं के अभाव में आप लापरवाह हो जाएंगे और किसी दिन आपकी लापरवाही का लाभ उठाकर कोई दूसरा राजा अपने राज्य पर आक्रमण कर देगा। इसीलिए मेरे आशीर्वाद में इस राज्य का ही हित है।

राज कवि का आशीर्वाद समझकर राजा संतुष्ट हो गए और उनके आशीर्वाद को स्वीकार कर लिया।

इस कथा की सीख

इस कथा की सीख यह है कि जब हमारे जीवन में समस्याएं आती हैं, हम लगातार उनसे निपटने के लिए नए-नए रास्ते खोजते हैं। समस्याओं से लड़कर ही कोई इंसान बड़ी सफलता हासिल कर पाता है।

परेशानियों से डरने वाले लोगों की तरक्की रुक जाती है। बाधाएं इंसान की योग्यता को निखारती हैं। जिस तरह सोना आग में तपकर निखरता है, उसी तरह इंसान परेशानियों का सामना करके और ज्यादा योग्य बनता है।

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