विज्ञापन आज के समय में अतिरंजित यथार्थ के अलावा कुछ भी नहीं है। यह लोगों को उकसा कर किसी उत्पाद को खरीदने के लिए प्रेरित करने के तत्पर होता है। बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की भरमार होने के कारण उत्पादक व कंपनियां अपनी वस्तुओं और सेवाओं के ‘विज्ञापन अभियान’ चलाती है। विज्ञापन का अर्थ है, भुगतान कर किसी वस्तु या सेवा की पब्लिसिटी करना। आमतौर पर हमें व्यापारी किया सामाजिक सुधार वाले विज्ञापन क्रम दर क्रम देखने को मिलते हैं, यह उसी रणनीति का हिस्सा होता है। अधिकतर या अभियान विज्ञापन एजेंसी द्वारा चलाए जाते हैं। किसी भी विज्ञापन अभियान का अंतिम उद्देश्य विषय वस्तु के बारे में जागरूकता बढ़ाना है और मांग उत्पन्न करना होता है। विज्ञापन अभियान के तीन आधार हैं:-

1. भय:- विज्ञापनदाता विज्ञापन में अपने को किसी अन्य कंपनी के उत्पाद के साथ तुलना कर अन्य कंपनी के उत्पाद की खामियां बताकर लोगों के मन मस्तिष्क में भय उत्पन्न करते हैं। यह अभय उत्पाद के विषय वस्तु के अनुसार होता है। जैसे:- खाद्य पदार्थों की वस्तुओं में स्वास्थ्य की हानि का भय, फैशन प्रोडक्ट में त्वचा की हानि का भय, आदि के आधार पर अपने निवेश सेवा को श्रेष्ठ बताना।

2. लालच:- विज्ञापन अभियान का दूसरा आधार लालच है। विज्ञापनदाता अपने विज्ञापन में उत्पाद या सेवा के प्रति लोगों के मन में लालच उत्पन्न करते हैं। जैसे:- उत्पादक द्वारा अपनी एक वस्तु खरीदने पर दो वस्तु फ्री देने की बात को कहना। इस ऑफर को विज्ञापन में लिखा जाता है। ‘बाय वन गेट टू’ , ठीक इसी तरह कई उत्पादक अपने वस्तु के साथ ‘लकी ड्रा’ इनाम रखते हैं, यह इनाम अधिकतर बहुत बड़ा होता है जैसे 1 करोड़ रुपए, ताकि इनाम के बारे में जानकर उपभोक्ता वस्तु खरीदने के लिए इच्छुक हो जाए। इन ऑफरों के कारण कई बार उपभोक्ता आवश्यकता से अधिक खरीद कर लेता है या कई बार अनावश्यक वस्तुएं खरीद लेता है।

3. आवश्यकता:- किसी भी वस्तु की आवश्यकता बताकर उसका विज्ञापन करना, विज्ञापन अभियान का तीसरा आधार है। इसमें उपभोक्ता को उत्पाद की आवश्यकता बताकर उसे खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे, कई कंपनियों ने कोरोना काल में, अपने विज्ञापन में बताया कि, ” उनके सैनिटाइजर से हाथ की सफाई से 90% कोरोनावायरस का अंत” हो जाता है। इसी तरह खाद्य पदार्थ और मेकअप प्रोडक्ट में आयुर्वेद पौधों का उपयोग कर उन्हें स्वास्थ्य और त्वचा की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया जाता है। इस तरह के विज्ञापनों में अधिकतर उपभोक्ता के मन में वस्तु की आवश्यकता को उत्पन्न किया जाता है। विज्ञापन में यह आवश्यकता, उपभोक्ता के जीवन में किसी कमी को बताकर या उसके जीवन स्तर में विकास करने वाले वस्तु की आवश्यकता को बताते हैं।

विज्ञापन की आचार संहिता

  1. विज्ञापन किसी भी धर्म, जाति, रंग, समुदाय को ठेस पहुंचाने वाला न हो।
  2. विज्ञापन भारतीय संविधान के नियमों के विरुद्ध नहीं होना चाहिए।
  3. विज्ञापन अपराधिक और कानून तोड़ने वाले विषयों को बढ़ावा ना दें।
  4. विज्ञापन में सरकारी पदों पर बैठे लोगों का और सरकारी चिन्हों का प्रयोग न करें( जब तक वह सरकारी विज्ञापन ना हो या उसकी आज्ञा ना हो)।
  5. विज्ञापन 2 राज्यों, जी लो या मित्र राष्ट्र देशों की आलोचना न करता हो।
  6. विज्ञापन में मॉडल को अभद्र या न्यूड पर नहीं किया जाना चाहिए।
  7. विज्ञापन में गलत तथ्यों को प्रकाशित या तथ्यों को गलत तरीके से प्रसारित नहीं करना चाहिए।
  8. विज्ञापन अंधविश्वास रूढ़ियों को बढ़ावा देने वाला ना हो।
  9. वित्तीय विज्ञापन में झूठी ब्याज पर या पैसा दोगुना हो जाएगा, ऐसी घोषणाओं यादव को बढ़ा चढ़ाकर नहीं छापा जा सकता है।
  10. विज्ञापन समुदाय, धर्म, जाति के प्रतिकूल न हों।
  11. ड्रक्स या प्रतिबंधित पदार्थ का विज्ञापन नहीं किया जा सकता है।
  12. विज्ञापन में दूसरे प्रोडक्ट की बुराई नहीं की जा सकती।
  13. किसी भी व्यक्ति, संस्थान या जगह की फोटो लगाएं तो उसकी अनुमति होनी चाहिए।
  14. अन्य विज्ञापन का हूबहू नकल नहीं होना चाहिए।
  15. लॉटरी में समस्त शर्तें कानून के अनुकूल और स्पष्ट होनी चाहिए।

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