अभी सुबह ही तो मिले थे हम उस पार्क में जहाँ हम दोनों पहली बार मिले थे। आज भी मुझे याद है जब मैं पार्क में बैठ कर गाने सुन रहा था और उसी समय वो पार्क के चक्कर लगा रही थी। उसके वो काली जीन्स और ऊपर वाइट शर्ट मुझे अजीब लगा कि व्यायाम और दौड़ने के लिए तो हल्के कपड़े पहने जाते हैं तो फिर इसने ऐसा क्यों पहन रखा है। इन्हीं सब बातों को सोचते हुए मुझे दो घंटे हो गए आश्चर्य ये है कि मैंने फ़ोन भी नहीं उठाया जबकि वो कई बार बज-बज के बंद हो चुका था पर तब भी उसी के बारे में सोचे जा रहा था। न जाने क्यों आज पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी लड़की को इतने ध्यान से देखा हो और उसके बारे में जानना चाहा हो। इन्हीं सब बातों को सोचते हुए मै घर आया और घर पर अपने काम में व्यस्त होते हुए भी मै उसी लड़की के बारे में सोचे जा रहा था।                 

अगले दिन सुबह थोड़ा लेट उठा क्योंकि आज बॉस के साथ मीटिंग थी और आफिस भी देर से ही जाना था इसलिए आज सुबह टहलने भी नहीं गया। टहलने का याद आते ही मुझे उस लड़की का चेहरा फिर दिखने लगा, उसकी चाल उसके पहनने का तरीका वो सब एक बार फिर मेरे आँखों के सामने आ गया और मै सोचने लगा कि आखिर क्यों उसकी याद आरही है ,पार्क में उसे बस देखा ही तो था जिसे सोचकर एक बार मन ने मुझे दुत्कार दिया पर अगले ही पल वो भी इसी सोच में डूब गया कि क्यो उसके बारे में सोच रहा हूँ। इन सब को सोचते हुए कब मेड खाना बना कर चली गयी पता नहीं चला। तभी बाहर गाने की आवाज से अपनी इस दुनिया मे वापस आया। हाँ अभी भी ऑफिस जाने के लिए बहुत समय था पर ,नहीं चाहता था कि अब कोई फालतू की सोच मन में आए इसलिए समय से पहले ही आफिस पहुँच गया और अपने केबिन में जाकर ऑफिस के काम में लग गया। ठीक एक बजे मीटिंग रूम में पहुँचा, वहाँ जो मैने देखा उस माहौल देख कर मुझे बीते सपने जैसा लगा और वहीं यह सोचने लगा कि कहीं कुछ ज्यादा तो नहीं सोच रहा हूँ कल के बारे में, सपना इसलिए कि कल पार्क में जिस लड़की को देखा था वह केबिन में बैठी हुई मुझे देख रही थी,अच्छी बात ये की मीटिंग के दौरान कोई भी ऐसा बिंदु नही आया जहाँ कुछ सोचने या समझने में समय लगे। खैर मीटिंग खत्म होते ही मुझे पता चला कि मुझे एक पद ऊपर कर दिया गया है और वह लड़की मेरे नीचे के पद पर कार्यरत होगी जिसपर मैं अभी काम कर रहा था , जब दोस्तों को पदवी की बात पता चली तो उन्होंने ऑफिस में इस खुशी मेंपार्टी रखने को कह दिया , उस दिन मुझे कोई भी नए काम से संबंधित काम नहीं दिया गया और उस दिन दोस्तों के साथ पार्टी एन्जॉय करने के चक्कर में समय से घर न जाकर थोड़ा लेट होने का मन बना लिया और जो आज  शॉपिंग करने का इरादा बनाया था उसे थकान और नींद ने धरा-के-धरा रहने दिया और कब सोफे पर सोया ये तो सुबह मेड द्वारा दरवाजे पर दस्तक देने के बाद ही समझ आया कि पेट के हाजमे की गोली की जगह दोस्त के लिए लाए हुए नींद की दवाईयों को रात में खा लिया था जिसकी वजह से सोफे पर बैठे बैठे ही सो गया था।               

अगले दिन, अभी मेड खाना बना ही रही थी कि फ़ोन पर घंटी बजी ‘प्यार हुआ इकरार हुआ है, प्यार से फिर क्यों डरता है दिल’ इस गाने को सुनते समय फ़ोन तो नहीं उठाना चाहता था, लेकिन फ़ोन का स्क्रीन जब देखा तो बॉस का फ़ोन था। फ़ोन उठाते ही बॉस ने कहा कि आज ऑफिस में कुछ नए एम्प्लॉयी आएंगे जिनका इंटरव्यू तुम्हें लेना है इसलिए आज एक घण्टे पहले ही कार्यालय आ जाना, बस यही कहकर फ़ोन रख दिया और मै इंटरव्यू के बारे में सोचने लगा।

ऑफिस पहुचते पर बॉस का गेटकीपर गेट पर ही आज खड़ा था जिसने मुझे बॉस के ऑफिस में सीधे जाने को कहा और वह खुद आगे चलकर बॉस के बगल में खड़ा हो गया। बॉस ने मुझे देखते ही थोड़ी मुस्कान के साथ कुर्सी पर बैठने को कहा और मेरे बिना कुछ बोले या पूछे ही उन्होंने बोलना शुरू कर दिया।जहाँ उन्होंने उस लड़की के बारे में बताया जिससे मै पहले ही ऑफिस में मिल चुका हूं और जो अब मेरे पद पर काम करेगी।बॉस ने उसका नाम मोनिका है बताया तभी फिर मै खयालो में खो गया पर बॉस के बातों ने फिर से वापस खींच लिया ,वह कह रहे थे कि ऑफिस के लिए ऐसे ही लोगों की जरूरत है ये तुम्हें तब पता चलेगा जब उसके काम को देखोगे। खैर, आज जो एम्प्लॉयी आएंगे उसमें वो भी होगी, मन तो था कि बिना  इंटरव्यू लिए उसे पद दे दें पर कुछ आपसी लोगों का मानना है कि इंटरव्यू की प्रतिक्रिया ले लेनी चाहिए ताकि कंपनी पर कोई सवाल न खड़ा कर सके। इंटरव्यू लेने से पहले बता दूं कि इंटरव्यू केवल नाम के लिए है असल में उसे पहले ही इस पद को दे दिया गया है और दिया भी क्यों न जाता वो मेरी बेटी जो है पर मै उसे एक ही समय में ऊँचे पद पर नहीं बैठा सकता। इन बातों को बेशक मै सुन रहा था पर अब समझ गया था कि बॉस क्या कहना चाहते हैं और मेरे प्रदोन्नती की उन्हें जल्दी क्यों थी।           

मैं अभी उनकी बात सुन ही रहा था कि इंटरव्यू देने वाले आ गए थे और केबिन के बाहर अपने नंबर का इन्तेजार करने लगे थे।बॉस ने मुझे अपनी भावनाओं को बता कर इंटरव्यू के लिए भेज दिया। उनके भेजते ही अपने कैबिन में आया। मुझे उस कैबिन में आये दस मिनट से ज्यादा हो गए थे पर मेरा मन अभी भी बॉस की कही बातों पर था।मुझे अब पता चल चुका था कि उन्होंने मुझे पद उन्नति क्यों दी और वो क्यो चाहते थे कि मै ही उस पद को संभालू, उन्होंने अपनी जगह मुझे ही इंटरव्यू लेने के लिए क्यों कहा वगैरा-वगैरा।इन्हीं सब के बातों को सोचते हुए मैंने एक एक कर सबको आने के लिए चौकीदार से कह दिया। सब एक एक कर आते गए और मै सबसे कुछ इधर उधर की बात पूछ कर बाहर करते गया ।अब मोनिका की बारी थी, जब उसका नाम बुलाया गया तो वो भी सभी की तरह ही फॉर्मलटी के अंदाज में मेरे कैबिन में प्रवेश किया। उसे सीट पर बैठने को कह कर कैबिन देखने लगा। कुछ समय बाद बिना कुछ पूछे जाने को कह दिया जहाँ अन्य इंटरव्यू देने वाले बैठे थे। परिणाम का तो पता ही था मुझे इसलिए मैंने इस इंटरव्यू को तबज्जू नहीं दिया।

अगले दिन एक नोटिस निकला, जिसमें मोनिका को सिलेक्ट न कर के किसी और को सिलेक्ट कर लिया गया था। मै इस बात से जब तक हैरान था जब तक बॉस ने मुझसे खुद आकर नही कहा, कि राज ये तो एक चाल थी तुम्हें परखने की, मै देखना चाहता था कि तुम इस परिस्थिति में कैसे घुलते हो, पर तुमने तो परिस्थिति का सामना बिल्कुल नहीं किया, ऐसा कैसे चलेगा। और जिसे तुमने साधारण इंटरव्यू देने वाली मोनिका समझा वो तुम्हारा इंटरव्यू था, जिसमें अफसोस के साथ तुम फेल हो गए। मोनिका ने न जाने क्या अच्छा देखा जो तुम्हें एक जिम्मेदार एम्प्लोयी ठहराया। बस इतना कहने के बाद वो केबिन में चले गए, उस समय मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर बॉस का काम ही है डाँटना, पर खुद ही केवल दिखावटी इंटरव्यू कह कर मुझे क्यों फसाया ये मुझे समझ नही आया।वह दिन मेरे लिए सबसे गंदा दिन था और शायद आखिरी भी। मै घर तो आज जल्दी निकल गया पर घर न जाने क्यों आज जाने का मन नही हो रहा था इसलिए उसी पार्क में जाकर बैठ गया जहाँ मोनिका को पहली बार देखा था।

अजब सा इत्तेफाक था या घटना थी कि कुछ ही देर में सर के ऊपर बादल मंडराने लगे, हवाएं साय साय चलने लगी और कुछ ही देर में मौसम सुहाना हो गया।अब मुझे ऑफिस कि खबर नहीं रही और मै उस आबो हवा से खेलने लगे, अभी हवा तेज चल ही रही थी, बारिश होने की संभावना पूरी हो गयी थी, बूंदे पड़ने लगी थी, तभी पीछे से एक आवाज़ आयी ‘राज’, एक पल ऐसा लगा कि भ्रम है कौन नाम पुकारेगा उसका यहाँ जनता ही वैसे कौन है, जो दोस्त हैं वो अभी मेरा घर जानते नहीं है। तभी एक बार फिर आवाज आई, ‘राज’ , अब मुझसे रुका नहीं गया और मैने पीछे मुड़ कर देख लिया। पीछे देखने पर पता चला कि वह मोनिका है जो अभी इस मौसम के रोमांच को अपने अंदर समा लेने आयी है, ठीक वैसे ही जैसे मैं यहाँ रोमांच के लिए और मूड ठीक करने के लिए आगया हूँ। अभी यह सब सोच ही रहा था कि मोनिका मेरे पास आकर बेंच पर बैठ गयी और बिना कुछ कहे मुझे मेरे गलतियों का कारण बताने लगी, उस समय गुस्सा तो बहुत था मन मे पर उसकी बाते जैसे जैसे मेरे कानों में जा रही थी वैसे वैसे मै शांत होता जा रहा था और अब मुझे एहसास हो गया कि वह इंटरव्यू मुझे सही रास्ते पर लाने और किसी बिंदु को कई तरह से सोचने के लिए करवाया गया था। इन सब बातों को सुनते और समझते हुए बारिश तेज हो गयी थी,और अब उस पार्क में केवल मै और मोनिका थे पर फिर भी न मैने मोनिका से कुछ कहा और न मोनिका ने अपने बात के कहने के अंदाज़ को बदला। अंत मे उसने बात को समझा कर खुद ही चलते हुए अंदाज में बस इतना कहा कि अपने को समझने की कोशिश करो और वह चली गयी। पर जाने के बाद फिर मेरा मन सोचने लगा कि आखिर ये कौन सा समय है समझाने का किसी को, लेकिन अब सारा मूड खराब हो गया था, ऐसा नहीं है कि मौसम अच्छा नही हो रहा था पर अब उस मौसम में किसी ने बेरंग ताल ठोक दिया था जिसके चलते आज घर पर मेड को घर पर आने के लिए मना कर दिया और आज के घटना के बारे में अपने बुद्धि में आए जमाव को निचोड़ने लगा इस निचोड़ने के चक्कर मे कब बिस्तर गया कब आँख में सपनों ने दस्तक दी ये पता नहीं चला, पता चला तो बस इतना कि संसार के इस अभागे पागल ने क्या अच्छा काम किया है….

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