1620478041368807 0

अंतड़ियों में जकड़ है,

पर मन में खटास है,,

एक पल की जिंदगी में,

न घर है और न घनश्याम है,,

जीने की चाहत है,

पर किराए की किल्लत है,,

इस जीवन के जीवनी में अब,

बस रुखसद होने की रवायत है,,

बुझे मन से चला है वो,

अब कर्म का झोला लिए,,

कि, लालची बना रहा,

इस संसार में किसके लिए,,

एक पल की जिंदगी में,

न घर है और न घनश्याम है,,

Photo credit:- Google photo


Discover more from अपना रण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

By Admin

Discover more from अपना रण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading