प्रेमाग्रह

सुनो! नई दिल्ली की पुरानी मकान की तरह हो तुम आधुनिकता की लंपट चुने,प्लास्टर, रंगों से एकदम दूर औरों की तरह मुझे किराएदार नही बनना है तुम्हारा, ना ही मुझे जबरन कब्जा जमाना है मुझे पूरे मकान को अपना बनाना है ,उसे सजाना है देखो मैंने अग्रिम में अपना छद्म पौरुष तुम्हें सौप दिया है …

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