JPC क्या है?
संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee – JPC) भारतीय संसद की एक विशेष समिति होती है। इसे किसी खास मुद्दे, घोटाले, वित्तीय अनियमितता या किसी गंभीर मामले की जाँच करने के लिए गठित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष जांच करना और सरकार को ठोस रिपोर्ट सौंपना होता है।
JPC का गठन कैसे होता है?
JPC का गठन संसद में प्रस्ताव पास करके किया जाता है।
- यह प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन में लाया जा सकता है।
- प्रस्ताव पर बहस और मंजूरी के बाद समिति का गठन होता है।
- इसमें दोनों सदनों के सांसद शामिल होते हैं।
JPC में कितने सदस्य होते हैं?
JPC के सदस्यों की संख्या मामले की गंभीरता और संसद की सहमति पर निर्भर करती है। आमतौर पर:
- 20 सदस्य लोकसभा से लिए जाते हैं।
- 10 सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं।
- इस तरह कुल 30 सदस्यीय समिति बनती है।
JPC का काम और अधिकार
JPC को संसद का समर्थन प्राप्त होता है और इसके पास गहन जांच करने की शक्ति होती है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं:
- किसी मामले से जुड़ी सभी फाइलें, दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगाना।
- सरकारी अधिकारियों, गवाहों और संबंधित लोगों से पूछताछ करना।
- किसी कंपनी या संगठन से जानकारी जुटाना।
- अपनी जाँच पूरी कर रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करना।
JPC की रिपोर्ट का महत्व
JPC अपनी जाँच पूरी करने के बाद रिपोर्ट संसद में रखती है।
- यह रिपोर्ट सरकार के लिए सलाहकार की तरह होती है।
- सरकार चाहें तो JPC की सिफारिशें लागू करे या न करे।
- फिर भी JPC की रिपोर्ट राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से काफी असरदार मानी जाती है।
भारत में JPC के कुछ प्रमुख उदाहरण
भारत में कई बार JPC बनाई गई है, जैसे—
- बोफोर्स घोटाला (1987)
- हरशद मेहता शेयर घोटाला (1992)
- सॉफ्ट ड्रिंक और कीटनाशक घोटाला (2003)
- 2G स्पेक्ट्रम घोटाला (2011)
इन मामलों में JPC ने गहन जांच कर संसद और जनता के सामने तथ्य रखे।
निष्कर्ष
JPC लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने का एक अहम साधन है। यह सरकार को जिम्मेदार ठहराने में मदद करती है और जनता का भरोसा संसद पर मजबूत करती है।
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