साफ-सफाई और सुरक्षा
- बच्चे को छूने या संभालने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह धोएं।
- घर को स्वच्छ और कीटाणुरहित रखें ताकि संक्रमण से बचाव हो सके।
- जो भी सदस्य बीमार हो वह शिशु से दूर रहे।
तापमान और कपड़े
- शिशु को जन्म के बाद तुरंत कपड़े या कंबल में लपेटें ताकि उसके शरीर की गर्मी बनी रहे।
- बच्चे को वयस्कों से 1-2 परत ज्यादा कपड़े पहनाएं, टोपी व मोज़े भी पहनाएँ।
- नहाने की बजाय पहले 24 घंटे तक बच्चे को स्पंज से साफ करें।
स्तनपान
- जन्म के एक घंटे के अंदर मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाएं।
- शुरुआती 6 महीने तक सिर्फ माँ का दूध सबसे उत्तम है — पूरक आहार न दें।
- ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
शारीरिक देखभाल
- शिशु को झटका न दें, गर्दन व सिर को सहारा दें।
- डायपर समय पर बदलें, बच्चा गीला न रहे।
- बार-बार बच्चे को गोद में लें, प्यार से बात करें, त्वचा से त्वचा का संपर्क बढ़ाएँ।
नींद व आराम
- शिशु को पीठ के बल सुलाएं, उसके बिस्तर को साफ रखें।
- उसके साथ बिस्तर साझा न करें बल्कि पालने में सुलाएं।
नवजात के लिए आवश्यक टीके और दवाएं
- हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B): जन्म के 24 घंटों के भीतर पहली खुराक देनी जरूरी है।
- बीसीजी (BCG): तपेदिक (टीबी) से बचाव के लिए जन्म के समय लगती है।
- ओपीवी (OPV): पोलियो की पहली खुराक — जन्म के समय दी जाती है।
डॉक्टर के निर्देश अनुसार, समय-समय पर अन्य अनिवार्य टीके (जैसे DPT, PCV, हिब, रोटावायरस, एमएमआर) लगवाएं। टीकाकरण कार्ड पर सभी तारीखें और टीके दर्ज रहें — समय से कोई टीका न छूटे।
किन बातों पर विशेष ध्यान दें
- बच्चे में यदि तेज बुखार, सांस में दिक्कत, दूध पीने में कमजोरी, लगातार रोना, पीलापन, सुस्ती, त्वचा में दाने या शरीर नीला नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- बच्चे का वजन, बढ़ना, मल-मूत्र नियमित देखना चाहिए।
- शिशु के कान, नाक, आंखों की नियमित सफाई बहुत जरूरी है।
अन्य ज़रूरी बातें
- बच्चे के सूखे व हल्के तेल की मालिश फायदा करती है पर दबाव न डालें।
- ज्यादा Visitors न बुलाएँ, भीड़-भीड़ के संपर्क से बचाएँ।
- किसी भी दवा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
सारांश
साफ-सफाई, समय पर ब्रेस्टफीडिंग, जरूरी टीकाकरण, सही वातावरण, पारिवारिक प्यार — नवजात शिशु की स्वास्थ्यपूर्ण वृद्धि के लिए सबसे जरूरी हैं। कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें। स्वस्थ शुरुआत, स्वस्थ जीवन की नींव बनती है।
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