SDG

भारत की प्रगति वैश्विक औसत से तेज़

भारत ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) 2030 के तहत मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। हाल ही में नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System – SRS) 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मातृ एवं बाल मृत्यु दर में सतत गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि देश अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों की दिशा में सही रास्ते पर अग्रसर है।

मातृ मृत्यु दर (MMR) में ऐतिहासिक गिरावट

2014-16 के दौरान भारत की मातृ मृत्यु दर 130 प्रति लाख जीवित जन्म थी, जो 2019-21 में घटकर 93 हो गई है। यह 37 अंकों की गिरावट को दर्शाता है। भारत ने 33 वर्षों (1990–2023) के दौरान 86% गिरावट दर्ज की है, जबकि वैश्विक गिरावट 48% रही है।

शिशु और बाल मृत्यु दर में निरंतर गिरावट

SRS 2021 रिपोर्ट के अनुसार:

  • शिशु मृत्यु दर (IMR) 2014 में 39 थी, जो 2021 में घटकर 27 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है।
  • नवजात मृत्यु दर (NMR) 2014 में 26 थी, जो 2021 में 19 प्रति 1000 रह गई।
  • पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (U5MR) 2014 में 45 से घटकर 2021 में 31 प्रति 1000 हो गई।

लिंग अनुपात और प्रजनन दर में सुधार

  • लिंगानुपात जन्म के समय (Sex Ratio at Birth) में भी सकारात्मक बदलाव हुआ है — 2014 में 899 से बढ़कर 2021 में 913 हो गया है।
  • कुल प्रजनन दर (Fertility Rate) 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 थी।

राज्यवार प्रदर्शन: कई राज्यों ने पहले ही हासिल कर लिए SDG लक्ष्य

मातृ मृत्यु दर लक्ष्य (≤70) प्राप्त करने वाले राज्य:

  • केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), कर्नाटक (63)

U5MR लक्ष्य (≤25) प्राप्त करने वाले राज्य/UT:

  • केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू-कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24), गुजरात (24)

NMR लक्ष्य (≤12) प्राप्त करने वाले राज्य/UT:

  • केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू-कश्मीर (12), हिमाचल प्रदेश (12)

सरकारी योजनाएं और रणनीतिक हस्तक्षेप: सफलता का आधार

भारत सरकार ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाएं चलाई हैं जिनमें विशेष रूप से निम्न शामिल हैं:

आयुष्मान भारत योजना:

दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, जिसमें ₹5 लाख तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवर प्रदान की जाती है। यह योजना गरीब परिवारों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करती है।

निःशुल्क संस्थागत प्रसव सुविधाएं:

हर गर्भवती महिला को निःशुल्क अस्पताल प्रसव, सी-सेक्शन सहित, दवाएं, जांच, परिवहन और पोषण सहायता प्रदान की जाती है।

स्वास्थ्य अवसंरचना का सशक्तीकरण

सरकार ने व्यापक स्तर पर अवसंरचना को मज़बूत किया है, जैसे:

  • Maternity Waiting Homes
  • MCH Wings (मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयाँ)
  • Obstetric HDUs/ICUs
  • Sick Newborn Care Units (SNCUs)
  • Newborn Stabilization Units (NBSUs)

सुधारात्मक तकनीकी उपाय और नवाचार

  • प्रेग्नेंसी के दौरान Corticosteroids का उपयोग
  • CPAP तकनीक का उपयोग
  • नवजातों के दृष्टि और श्रवण की स्क्रिनिंग

इन उपायों के ज़रिए हर साल 300 लाख सुरक्षित गर्भधारण और 260 लाख स्वस्थ जन्म सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी और डेटा आधारित नीतियाँ

भारत सरकार डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए मातृ और बाल स्वास्थ्य की रियल टाइम निगरानी कर रही है, जिससे नीति निर्धारण और योजना निर्माण अधिक प्रभावी हुआ है।

निष्कर्ष:

भारत ने मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज कर, 2030 तक के SDG लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में मजबूत प्रगति की है। यह सफलता सरकार की सशक्त योजनाओं, अवसंरचना के विस्तार, और गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं की बदौलत संभव हो सकी है।

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