कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब किसानों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत एक विशेष कृषि पैकेज की घोषणा की गई। इस पैकेज की कुल राशि ₹1.63 लाख करोड़ थी, जो सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र, डेयरी, मत्स्य पालन और allied sectors को सशक्त बनाने के लिए थी।
कृषि पैकेज का उद्देश्य
- कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करना
- सप्लाई चेन को मजबूत बनाना
- किसानों की आय में वृद्धि करना
- डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देना
- कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना
प्रमुख प्रावधान और घोषणाएं
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (₹1 लाख करोड़)
- इस फंड का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट आदि की स्थापना करना है। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
पशुपालन और डेयरी विकास (₹15,000 करोड़)
- डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए यह राशि आवंटित की गई। इसमें मवेशियों के टीकाकरण, डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट, फीड उत्पादन आदि शामिल हैं।
मत्स्य पालन क्षेत्र को समर्थन (₹20,000 करोड़)
- इस राशि का उपयोग बंदरगाहों का विकास, मछली भंडारण केंद्र, प्रसंस्करण इकाइयों और रोजगार सृजन के लिए किया गया।
टॉप टू टोटल योजना (TOP to TOTAL) – ₹500 करोड़
इस योजना के तहत फलों और सब्जियों की कीमत स्थिरता और सप्लाई चेन में सुधार के लिए सहायता दी गई।
किसानों के लिए लाभ
- बेहतर बाजार और भंडारण सुविधा
- उन्नत सिंचाई और पैदावार तकनीक
- कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा
- रोजगार के नए अवसर
- आय में स्थिरता और वृद्धि
कौन कर सकता है लाभ प्राप्त?
- छोटे, सीमांत और मध्यम किसान
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- कृषि स्टार्टअप्स
- सहकारी समितियां
आवेदन कैसे करें?
- राज्य कृषि विभाग या नजदीकी CSC केंद्र में संपर्क कर सकते हैं।
- ऑनलाइन पोर्टल जैसे agriinfra.dac.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन के साथ जमीन के दस्तावेज, बैंक खाता, पहचान प्रमाण आवश्यक होंगे।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि पैकेज न केवल आर्थिक दृष्टि से किसानों को मजबूती देता है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से कृषि क्षेत्र को टिकाऊ, आधुनिक और लाभदायक बनाता है। यदि इसका पूर्ण लाभ सही समय पर किसानों तक पहुंचे, तो देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
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