gehun ki baat

गेहूं की कटाई के बाद खेत प्रबंधन की जरूरत

जब गेहूं की फसल कटाई हो जाती है, तो खेत खाली रह जाता है। ऐसे में यदि खेत को सही तरीके से प्रबंधित न किया जाए तो भूमि की उर्वरता प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को फसल कटाई के बाद खेत की देखभाल और अगली फसल की तैयारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हरी खाद का उपयोग करें

खाली खेत में हरी खाद फसलों जैसे सनई, ढैंचा या मूंग की बुआई करना एक बेहतरीन विकल्प है। ये फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाती हैं और नाइट्रोजन की पूर्ति करती हैं, जिससे अगली फसल के लिए भूमि तैयार रहती है।

अगली फसल के लिए मिट्टी परीक्षण कराएं

कटाई के बाद खेत में मिट्टी परीक्षण अवश्य कराना चाहिए। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता का सही आंकलन होता है और किसान अगली फसल के अनुसार उर्वरक प्रबंधन कर सकते हैं।

फसल चक्र अपनाएं

खेती में विविधता लाने के लिए किसान फसल चक्र अपनाएं। जैसे गेहूं के बाद दलहन (मूंग, उड़द) या तिलहन (सोयाबीन) की बुआई करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और कीट-रोग का प्रकोप भी कम होता है।

खरपतवार और अवशेष प्रबंधन

गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों और खरपतवारों का निपटान समय पर करना चाहिए। अवशेषों को जलाने की बजाय उनका जैविक तरीके से निस्तारण करें या कंपोस्ट बनाएं। इससे खेत की मिट्टी में पोषक तत्व भी बढ़ते हैं।

रबी से खरीफ की तैयारी

रबी सीजन की समाप्ति के बाद खरीफ फसलों की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। खेत की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और आवश्यकतानुसार सिंचाई की व्यवस्था करें। खरीफ फसल के लिए समय पर बुआई करना बहुत जरूरी होता है।

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