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आज के समय में खेती-बाड़ी केवल अनाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि सब्जियों की खेती से भी किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक सब्जी है टिंडा, जिसे ‘राउंड गॉरड’ के नाम से भी जाना जाता है। यह सब्जी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। टिंडे की खेती एक ऐसी नगदी फसल है जो कम समय में अच्छा मुनाफा देने की क्षमता रखती है। आइए जानें, टिंडे की खेती से जुड़ी हर अहम जानकारी।

टिंडे की खेती कैसे करें?

टिंडे की खेती के लिए ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती। इसके लिए बस थोड़ी सी उपजाऊ जमीन की आवश्यकता होती है, जहां पर्याप्त धूप और जल निकासी की व्यवस्था हो। इसके बीज अप्रैल के आखिरी सप्ताह में बोने चाहिए। यदि आप दो बाई पद्धति से बुवाई करते हैं तो आपको करीब 8000 बीजों की जरूरत होगी।

बुवाई के 10 से 15 दिन के अंतराल पर कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी होता है ताकि फसल की रक्षा की जा सके। अच्छी देखरेख और नियमित सिंचाई के साथ टिंडे की फसल 35 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है और कटाई के लिए उपयुक्त हो जाती है।

टिंडे की खेती में लागत कितनी आती है?

टिंडे की खेती को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती। इसकी खेती में मुख्यतः प्लास्टिक मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, खाद और बीज आदि पर खर्च आता है। औसतन एक एकड़ की खेती में 35,000 से 40,000 रुपये तक की लागत आती है। लेकिन इस लागत के मुकाबले मुनाफा कहीं ज्यादा होता है।

टिंडे की खेती से मुनाफा कितना होता है?

टिंडा एक तेजी से बढ़ने वाली फसल है जिसकी बाजार में डिमांड हमेशा बनी रहती है। अगर आप एक सीजन में टिंडे की सफल खेती करते हैं तो आप लगभग 3 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यह फसल कम समय, कम पानी और कम देखभाल में भी अच्छा उत्पादन देती है, जिससे यह छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए एक फायदे का सौदा बन जाती है।

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