भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद वह विदेशों से चाय आयात करता है। यह तथ्य जितना चौंकाने वाला है, उतना ही व्यावसायिक दृष्टिकोण से तार्किक भी। हाल ही में लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में भारत ने 25.21 मिलियन किलोग्राम चाय का आयात किया, जिसका मूल्य 53.30 मिलियन डॉलर रहा। यह देश के कुल 1382.03 मिलियन किलोग्राम चाय उत्पादन का 1.82% है।
भारत को चाय आयात क्यों करना पड़ता है?
जितिन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि भारत जो चाय आयात करता है, उसका उपयोग ब्लेंडिंग (सम्मिश्रण) और रि-एक्सपोर्ट (पुनः निर्यात) के लिए किया जाता है। यानी आयातित चाय को स्वदेशी चाय के साथ मिलाकर एक नया उत्पाद बनाया जाता है जिसे बाद में विदेशों में निर्यात किया जाता है। इससे न केवल भारतीय चाय के फ्लेवर और गुणवत्ता को अनुकूल बनाया जाता है, बल्कि वैश्विक बाजार की मांग भी पूरी की जाती है।
GI टैग वाली चाय के साथ मिलावट पर रोक
सरकार ने इस बात पर कड़ा रुख अपनाया है कि आयातित चाय को GI टैग वाली स्वदेशी चाय (जैसे दार्जिलिंग, असम, नीलगिरी) के साथ मिक्स नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा किया जाता है, तो उस उत्पाद को GI चाय के रूप में प्रमोट नहीं किया जा सकता।
लेबलिंग और प्रमाणपत्र की अनिवार्यता
सरकार ने चाय आयातकों और निर्यातकों के लिए यह आवश्यक किया है कि:
🔹चाय की पैकेजिंग पर साफ लिखा जाए कि उसमें आयातित सामग्री है।
🔹आयात या निर्यात से पहले Tea Council Portal से Clearance Certificate लेना अनिवार्य है।
🔹चाय के पैकेट पर उत्पत्ति स्थान (Origin) का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
भारत और केन्या: चाय व्यापार में संबंध
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत केन्या से चाय आयात करने वाला सबसे बड़ा देश है, मंत्री ने इनकार किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 2024 में केन्या के कुल चाय निर्यात का सिर्फ 2.83% हिस्सा आयात किया है। यानी भारत केन्या के लिए कोई प्रमुख चाय आयातक नहीं है।
स्वदेशी चाय उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिशें
सरकार ने ‘चाय विकास और संवर्धन योजना’ (Tea Development and Promotion Scheme) के तहत कई कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य भारतीय चाय के उत्पादन को बढ़ाना और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत चाय बागानों के आधुनिकीकरण, नई पौध लगाने, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है।
भारत का वैश्विक चाय उत्पादन में योगदान
🔹विश्व चाय उत्पादन में भागीदारी: 21%
🔹वैश्विक निर्यात में भागीदारी: 12%
🔹2023-24 में उत्पादन: 1382.03 मिलियन किलोग्राम
🔹2023-24 में निर्यात: 260.71 मिलियन किलोग्राम
🔹CAGR (2021-22 से 2023-24):
✅उत्पादन में वृद्धि – 1.39%
✅निर्यात में वृद्धि – 13.95%
नीलामी मूल्य में भी सुधार
2024-25 (अप्रैल से जनवरी) की अवधि में चाय का अखिल भारतीय औसत नीलामी मूल्य ₹203.15 प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल की तुलना में 20.39% अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चाय की मांग और कीमत दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
चाय आयात एक रणनीतिक निर्णय
भारत द्वारा चाय आयात किया जाना कोई कमी नहीं, बल्कि एक व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखी जाती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बल मिलता है। सरकार की ओर से उठाए गए नियामक और विकासात्मक कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि स्वदेशी चाय ब्रांड और गुणवत्ता की पहचान बनी रहे।
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