गर्मियों के मौसम में तरबूज (Watermelon) और खरबूजे (Muskmelon) की मांग बाजार में तेजी से बढ़ जाती है, जिससे इनकी खेती किसानों के लिए एक बेहतर Income Source बनती जा रही है। रबी फसलों की कटाई के बाद यदि किसान तरबूज और खरबूजे की बुआई करना चाहते हैं, तो यह समय उनके लिए उपयुक्त है। गर्म जलवायु इन दोनों फसलों की पैदावार के लिए आदर्श मानी जाती है।
मिट्टी और खेत की तैयारी
हालांकि तरबूज और खरबूजा किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाए जा सकते हैं, लेकिन Loamy और Sandy Soil इनकी खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। खेत की 2 से 3 बार कल्टीवेटर से जुताई करके पाटा चलाना चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 200–250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए।
उन्नत किस्मों का चयन
तरबूज की उन्नत किस्में
तरबूज की बेहतर पैदावार के लिए किसान Improved Varieties जैसे अर्का ज्योति, अर्का आकाश, अर्का ऐश्वर्य, अर्का मधु, शुगर बेबी, अर्का मानिक, असायी यामातो, स्पेशल-1, उन्नत शिपर, दुर्गापुरा मीठा और दुर्गापुरा लाल जैसी किस्में चुन सकते हैं। बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 3.5 से 5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
खरबूजे की उन्नत किस्में
खरबूजे की फसल के लिए पूसा रसराज, पूसा मधुरस, पूसा सरदा, पूसा शरबती, पूसा मधुरिमा, अर्का जीत और अर्का राजहंस जैसी उन्नत किस्में अपनाई जा सकती हैं। इसमें प्रति हेक्टेयर 4 से 6 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
बुआई और रोपाई का तरीका
बुआई से पहले बीजों का Seed Treatment जरूरी है ताकि कीट और रोगों से बचाव हो सके। इसके लिए बीज को कार्बेन्डाज़िम + मैंकोजेब (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करें। बुआई के लिए Thala Method उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें खेत में पूर्व से पश्चिम दिशा में 45 से 60 सेमी चौड़ी और 30 से 40 सेमी गहरी नालियाँ बनानी चाहिए। नालियों के बीच 2 से 2.5 फीट की दूरी और हर नाली के किनारे 50 से 60 सेमी की दूरी पर थाले बनाएं। इन थालों में 2–3 बीज 1–2 सेमी गहराई पर बोएं या तैयार पौधे लगाएं।
उर्वरकों की आवश्यकता
खरबूजे की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 80 किलोग्राम नाइट्रोजन (N), 75 किलोग्राम फॉस्फोरस (P), और 50 किलोग्राम पोटाश (K) की आवश्यकता होती है। फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपाई के समय दें। बची हुई नाइट्रोजन को 30–40 दिन बाद देना चाहिए। वहीं तरबूज के लिए 80 किग्रा N, 60 किग्रा P और 60 किग्रा K प्रति हेक्टेयर जरूरी होते हैं। नाइट्रोजन को तीन भागों में बांटकर – एक भाग बुआई के समय, दूसरा 25–30 दिन बाद और तीसरा 40–45 दिन बाद देना चाहिए।
सिंचाई और पोषण
फसल की ज़रूरत और मिट्टी की नमी के अनुसार 5 से 6 बार सिंचाई करनी होती है। फसल को आवश्यक पोषण देने के लिए Water Soluble Fertilizer जैसे NPK 18:18:18 की 1 किलो मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। Drip Irrigation के माध्यम से 3 से 4 किलो मात्रा का उपयोग प्रभावी होता है। कुल मिलाकर, यदि किसान सही तकनीक और उन्नत किस्मों का चयन करते हैं, तो तरबूज और खरबूजे की खेती उन्हें गर्मी के सीजन में बेहतर मुनाफा दिला सकती है।
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