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गर्मियों में बोई जाने वाली Moong Crop की बुआई का समय शुरू हो गया है, और इसी के साथ कृषि विभाग ने किसानों को इस फसल की सुरक्षा को लेकर एक अहम सलाह जारी की है। विभाग ने मूंग की फसल में कुछ हानिकारक रसायनों जैसे Paraquat और Glyphosate (Safaaya) के प्रयोग से बचने की सिफारिश की है। इन दवाओं का उपयोग खरपतवार नष्ट करने के लिए किया जाता है, लेकिन इनका असर न सिर्फ फसल, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी खतरनाक होता है।

क्या हैं Paraquat और Glyphosate?

Glyphosate एक प्रकार का Herbicide है, जो विशेषकर सकरी और चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवारों को खत्म करने के लिए प्रयोग किया जाता है। वहीं, Paraquat का इस्तेमाल फसल को जल्दी सूखाने के लिए किया जाता है, जिससे कटाई हार्वेस्टर के माध्यम से जल्दी की जा सके। हाल के वर्षों में किसानों द्वारा इन दोनों रसायनों का अत्यधिक उपयोग देखने को मिला है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, Glyphosate पौधों के जरूरी Amino Acid Synthesis को रोक देता है, जिससे वे मर जाते हैं। लेकिन यह रसायन मिट्टी और पानी में लंबे समय तक बना रहता है और वहां मौजूद लाभदायक Microorganisms को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, यह मानव शरीर में Digestive, Respiratory और Nervous System को प्रभावित कर सकता है। इसके संपर्क में आने से आंखों में जलन, त्वचा पर रैशेज़, गले में खराश और अस्थमा जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। यदि गलती से यह निगल लिया जाए, तो उल्टी, जलन और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

कृषि विभाग की सिफारिश

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि मूंग की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए Natural Methods या कम हानिकारक विकल्पों का उपयोग करें और पेस्टीसाइड्स का छिड़काव बहुत सीमित मात्रा में करें। विभाग का उद्देश्य किसानों को स्वस्थ कृषि पद्धतियों की ओर प्रोत्साहित करना है जिससे ना सिर्फ फसल की गुणवत्ता बनी रहे, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता भी सुरक्षित रह सके।

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