कांगड़ा देवी का ऐतिहासिक महत्व है, जहां एक ओर पांडवों द्वारा इसके निर्माण की मान्यता है। वहीं इसे कई बार विदेशी आक्रमणकारियों ने लूटा, लेकिन हर बार इसके पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर में तीन प्रमुख पिंडियाँ हैं: मां ब्रजेश्वरी, भद्रकाली और एकादशी की पिंडी।
ब्रजेश्वरी देवी का मंदिर
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ब्रजेश्वरी देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता भगवान शिव के रूप भैरव नाथ के साथ विराजमान हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती का दाहिना वक्ष गिरा था। यह धाम नरगकोट के नाम से भी जाना जाता है।
दुर्गा स्तुति में इस मंदिर का वर्णन किया गया है। मंदिर के निकट बाण गंगा है, जिसमें स्नान करने का विशेष महत्व है। भक्त सालभर मां के दरबार में आकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, लेकिन नवरात्र के अवसर पर मंदिर की शोभा अद्भुत होती है। मंदिर में दर्शन करने से भक्त की हर कठिनाई दूर हो जाती है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। पांडवों ने माता को सपने में देखा था और बताया गया था कि वे कांगड़ा जिले में स्थित हैं। इस मंदिर को विदेशियों द्वारा कई बार लूटने का भी उल्लेख है। 1009 ईस्वी में गजनवी शासक महमूद ने इस मंदिर को लूटकर नष्ट कर दिया था।
मोहम्मद गजनवी ने यहां पांच बार लूटपाट की। इसके बाद 1337 ईस्वी में मुहम्मद बीन तुगलक और पांचवीं शताब्दी में सिकंदर लोदी ने भी इस मंदिर को नष्ट किया। एक बार अकबर ने यहां आकर मंदिर के पुनर्निर्माण में सहयोग किया था। 1905 में आए भूकंप से मंदिर पूरी तरह नष्ट हो गया, लेकिन सरकार ने 1920 में वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
देवी की उपासना और प्रसाद
ब्रजेश्वरी मंदिर में माता पिंडी रूप में विराजमान हैं। यहां माता का प्रसाद तीन भागों में बांटा जाता है – पहला महासरस्वती, दूसरा महालक्ष्मी और तीसरा महाकाली को चढ़ाया जाता है। गर्भगृह में तीन पिंडियाँ हैं: पहली मां ब्रजेश्वरी, दूसरी मां भद्रकाली और तीसरी एकादशी की पिंडी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन यहां चावल का उपयोग नहीं किया जाता, लेकिन इस शक्तिपीठ में मां एकादशी स्वयं उपस्थित हैं, इसलिए उन्हें प्रसाद के रूप में चावल चढ़ाया जाता है। कांगड़ा मां के दरबार में पांच बार आरती का विधान है, और यहां बच्चों के मुंडन करवाने की भी व्यवस्था है।
सभी के लिए आस्था का केंद्र
ब्रजेश्वरी मंदिर में हिंदुओं और सिखों के अलावा मुस्लिम समुदाय के लोग भी आस्था के फूल चढ़ाते हैं। मंदिर में तीन गुंबद हैं, जो तीन धर्मों के प्रतीक हैं – पहला हिंदू धर्म का, दूसरा सिख संप्रदाय का, और तीसरा मुस्लिम समाज का। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर का वध करने के बाद मां दुर्गा को चोट आई थीं, और उन्होंने अपनी चोटों को दूर करने के लिए अपने शरीर पर मक्खन लगाया था। जिस दिन मां ने मक्खन लगाया, उस दिन देवी की पिंडी को मक्खन से ढका जाता है और सप्ताहभर उत्सव मनाया जाता है।
इस प्रकार, कांगड़ा देवी का यह शक्तिपीठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक समृद्ध इतिहास और अद्भुत सांस्कृतिक प्रतीकों का भी वाहक है।
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