Bangluru: प्रधानमंत्री मोदी ने केम्पेगौड़ा की 108 फीट कास्य प्रतिमा का किया अनावरण, वंदे भारत के पांचवे ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

Prime minister, TODAY inaugurated the following in Bengaluru

  • World class terminal 2 airport.
  • Vande Bharat Express (5th).
  • Bengaluru founder kempegowda’s statue.
  • Launch (amrut) 2.0 Scheme.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी दौरे के बाद दक्षिण भारत की यात्रा पर हैं। वह कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचे जहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत, सीएम बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के धारवाड़ के सांसद प्रल्हाद जोशी ने उनका स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के बाद उन्होंने कवि कनक दास और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने बंगलूरु के केएसआर रेलवे स्टेशन पर पांचवीं वंदे भारत एक्सप्रेस व भारत गौरव काशी दर्शन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 का उद्घाटन किया। इसे करीब 5,000 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इससे एयरपोर्ट की क्षमता 2.5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष से बढ़कर 5-6 करोड़ हो जाएगी। करीब 2.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल के गेट लाउंज में 5,932 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी।

तीन घंटे में पूरा होगा चेन्नई से बंगलूरू तक का सफर

मैसूर से चेन्नई जाने वाली वंदे भारत ट्रेन दक्षिण भारत की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बंगलूरू से चेन्नई के लिए शताब्दी एक्सप्रेस, बृंदावन एक्सप्रेस और चेन्नई मेल जैसी कई ट्रेनें हैं। हालांकि स्पीड और सुविधाओं के मामले में इस लाइन पर अपने आप में एक अनोखी ट्रेन होगी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से एक प्रमाण पत्र के साथ ट्वीट कर कहा था कि हमारे लिए गर्व की बात है कि स्टैच्यू ऑफ प्रॉस्पेरिटी वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार किसी शहर के संस्थापक की पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। बंगलूरू के संस्थापक केम्पेगौड़ा को श्रद्धांजलि। 

केम्पेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का किया अनावरण

प्रधानमंत्री मोदी ने नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का भी आज अनावरण किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, किसी शहर के संस्थापक की यह पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसे समृद्धि की मूर्ति कहा जाता है और बंगलूरू के विकास की दिशा में शहर के संस्थापक केम्पेगौड़ा के योगदान को याद रखने के लिए बनाया गया है। 

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हवाईअड्डे पर 220 टन वजनी प्रतिमा स्थापित की गई
केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 220 टन वजनी प्रतिमा स्थापित की गई है। इसमें चार टन वजनी तो सिर्फ तलवार ही है। प्रतिमा के अलावा, परियोजना में 16वीं शताब्दी के सरदार को समर्पित 23 एकड़ क्षेत्र में एक विरासत थीम पार्क है, जिसकी कुल लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है। पूर्ववर्ती विजयनगर साम्राज्य के तहत एक सामंती शासक केम्पेगौड़ा ने 1537 में बेंगलुरु की स्थापना की थी। वह वोक्कालिगा समुदाय के बीच सम्मानित हैं, जो पुराने मैसूर और दक्षिणी कर्नाटक के अन्य हिस्सों में अधिक संखया में हैं।  

प्रसिद्ध मूर्तिकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित राम वनजी सुतार ने प्रतिमा को डिजाइन किया है। सुतार ने गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ और बंगलूरू के विधान सौध में महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाई थी। अनावरण के अग्रदूत के रूप में राज्य भर में 22,000 से अधिक स्थानों से ‘मृतिक’ (पवित्र मिट्टी) एकत्र किया गया था, जिसे मूर्ति के चार टावरों में से एक के नीचे मिट्टी के साथ प्रतीकात्मक रूप से मिश्रित किया गया। 21 विशेष वाहनों ने पिछले दो सप्ताह के दौरान गांवों, कस्बों और शहरों सहित पवित्र मिट्टी एकत्र की थी।

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