चित्तौड़ की कहानी……प्रिय द्विवेदी
जिस माटी पर चली पद्मिनी महारानी,
हे चित्तौड़गढ़ चलो भ्रमण तुम्हारा करते है।
नम नयनों से नमन तुम्हारा करते है,
ये अश्रु अनुसरण तुम्हारा करते है।।
हे भारत के दुर्गों के मुखिया,
स्वर्ग सी धरा के सूरेद्र तुम्हीं हो।
कोटि कोटि नारों मे नरेंद्र तुम्हीं हो,
राजपूती चेतना का केंद्र तुम्हीं हो।।
चित्तौड़ दुर्ग की गगन चूमती ऊँचाई थी,
जब महि मलेच्छों के आतंक से थर्राई थी,
जब माताओं ने विधाओं सी चित्कार मचाई थी,
पश्चिम से क़ासिम आक्रांता की आंधी आई थी,
राजा जिसने जब नंगी तलवार नाचाई थी,
अरबियों से पंजाब सिंध की लाज बचाई थी,
ऐसे बप्पा रावल और उनकी ठाकुराई थी।।
इस बार न बप्पा थे, न रहे गोरा बदल सेनानी,
राजपूतों के सम्मुख इस बार सेना तुर्काई थी।
सदियों बाद फिर से एक आफत आई थी,
वक़्त नेफिर से चित्तौड़ पर निगाह दोहराई थी।।
महावीर गोरा-बादल-सा न कोई महाबली था,
जो थे कारण कभी खिलजी के खलबली का,
युद्ध में कुर्बानी को तैयार कली-कली था,
नौनिहाल कल तक था आज वही वली था,
लिए खड़ा तलवार कटार बच्चा गली गली का,
और तुर्कों को न था मर्यादाओं का सलीका,
अशिष्ट कहाँ मानते है कभी संदेश अली का!
इधर रणभूमि में श्रोणित का सागर,
उधर दुर्ग के भीतर जौहर की खाई थी।
एक तरफ तुर्कों की कुटिल तुर्काई थी,
राजपूतों ने की उसूलों साथ लडाई थी।।
इतिहास भी चीख कर कहता है,
जब मलेच्छों ने विध्वंस मचाया था।
राजपूतों के पीठ पर तलवार चलाया था,
छत्राणि यों ने जौहर से सतीत्व बचाया था।।
छोड़कर दिल्ली जीतने जो थार गया,
कामुक क्रूर मगरूर मलेच्छ मक्कार गया,
तख़्त के खातिर अपनों को ही मार गया,
जौहर के तेज के आगे होकर लाचार गया,
बर्बर सरताज़ हो बेसुध, बेबस, बेज़ार गया,
खोकर साख सिकंदर ए सानी सीमा पार गया,
महारानी पद्मिनी से जीता युद्ध हार गया।।
चित्तौड़ की कहानी……प्रिय द्विवेदी
कवि परिचय:- कवि का नाम सत्य प्रिय द्विवेदी है और मूल रूप से प्रयागराज के निवासी है तथा प्रयागराज
के ही यूइंग क्रिस्टियन कॉलेज से बी. एड. कोर्स मे अध्ययनरत है।
Instagram:- @satyashabd
Read more
- श्रीनिवासन रामानुजन ने सपने में देख लिया था ब्लैक होल!बना दिया था फॉर्मूला
- अपराधों की गिरफ्त में महिलाएं
- Jansanchar madhyam ke siddhant
- भारत में लैंगिक असमानता की स्थिति , समस्या और समाधान
- गांधीवाद की प्रासंगिकता
Discover more from अपना रण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


[…] चित्तौड़ की कहानी […]