अपना रण
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मैं कुछ लोगों से मिला
कुछ यानी कि वही तीन चार लोग
वे बहुत खुश थे
क्योंकि वे कल्पनाएं कर रहे थे
फाख्ता पक्षी की, सुंदर वसन्त की, कोपलों में ठहरे जल की,
एक शहर की जो दिन रात की भागदौड़ से उक्ताकर सो रहा है,
एक ऐसे शहर की जहां गाड़ियों की पों पों से मधुर संगीत निकल रहा है,
एक गांव की जो थोड़े से में ही समृद्ध है
पूर्ण है, खुशहाल है
एक ऐसे प्रेमी युगल की जो यह जान चुके हैं कि आखिर प्रेम क्या है?
एक ऐसे सपने की जो जीने की आशा से उन्हें भरे हुए है
वे कुछ लोग
जो बहुत खुश हैं; वे इस बात से अनभिज्ञ हैं कि वे मेरी कल्पनाएं हैं
पर फिर भी वह मुझसे पूछ रहे हैं,
तुम यहां क्या कर रहे हो
तुम कौन हो?
क्या हमारी ही कोई कल्पना हो?
मैं स्तब्ध हूँ
क्या जवाब दूं
वे मुझपर हंस रहे हैं
मैं आशंकित हो चुका हूँ; इस आशंका में अस्तित्व का खतरा है
क्या वास्तविकता कल्पना है?
या कल्पना वास्तविकता है?

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By Vishek

Writer, Translator

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