मार्कोस

मार्कोस इंडियन नेवी के स्पेशल मरीन कमांडोज हैं, स्पेशल ऑपरेशन के लिए इंडियन नेवी के इन कमांडोज को बुलाया जाता है। यह कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। मार्कोस हाथ पैर बंधे होने पर भी करने में माहिर होते हैं । मार्कोस का निकनेम ‘मगरमच्छ’ है। अप्रैल 1986 में नेवी ने एक मैरिटाइम स्पेशल कोर्ट की योजना शुरू की थी। यह एक ऐसी फ़ोर्स है जो मुश्किल आपरेशनों और काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकते हैं।

मार्कोस कमांडो बनना आसान नहीं है। इसके लिए सेलेक्ट होने वाले कमांडोज को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। 20 साल के उम्र वाले 1000 युवा सैनिकों में से, एक का सिलेक्शन मारकोस फ़ोर्स के लिए होता है। इसके बाद इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है।

सिलेक्शन के लिए 5 सप्ताह की एक कठिन परीक्षा का दौर होता है जो कि इतना कष्टकारी होता है कि लोग इसकी तुलना नर्क से भी करते हैं। इस प्रक्रिया में ट्रेनी को सोने नहीं दिया जाता है, भूखा रखा जाता है और कठिन परिश्रम करवाया जाता है। इस चरण में जो लोग ट्रेनिंग छोड़कर भागते नहीं हैं उनको वास्तविक ट्रेनिंग के लिए चुना जाता है।

मार्कोस की वास्तविक प्रेमी लगभग 3 साल तक चलती है। इस ट्रेनिंग में इनको जांघों तक कीचड़ में घुसकर 800 मीटर दौड़ लगानी पड़ती है और इस दौरान उनके कंधों पर 25 किलो का वजन भी रखा जाता है।

मार्कोस आम सैनिक से कई गुना अधिक क्षमता वाले होते हैं। चाहे अरब सागर की गहराई में बिना ऑक्सीजन युद्ध हो या बर्फीले पानी वाली वुलर झील हो, मार्कोस कमांडोज वहां उस हालत में भी आधे घंटे के लगभग लड़ सकते हैं।

मार्कोस जल, थल और वायु सभी जगह ऑपरेशन को अंजाम देने में महारत हासिल रखते हैं। भारत के मार्कोस कमांडो सबसे ज्यादा ट्रेंड और मॉडर्न माने जाते हैं। मार्कोस को दुनिया के बेहतरीन नेवी सील्स की तर्ज पर विकसित किया जाता है।

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