गोल मिर्च, जिसे शिमला मिर्च (Capsicum) भी कहा जाता है, एक स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है। यह सब्जी बाजार में हमेशा मांग में रहती है और किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। खास बात यह है कि इसे खुले खेतों में भी और पॉलीहाउस में भी उगाया जा सकता है।
जलवायु और मौसम
गोल मिर्च की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। अत्यधिक गर्मी या सर्दी दोनों ही इसके लिए नुकसानदेह होती है। 20°C से 25°C का तापमान इसके लिए आदर्श माना जाता है।
बुवाई का समय:
- मैदानी इलाकों में: अक्टूबर से नवंबर
- पहाड़ी इलाकों में: फरवरी से मार्च
उपयुक्त मिट्टी और खेत की तैयारी
गोल मिर्च के लिए हल्की, दोमट या रेतीली-दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उत्तम मानी जाती है। pH मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
खेत की तैयारी:
- मिट्टी को अच्छी तरह जोतें।
- सड़ी गोबर की खाद (25-30 टन/हेक्टेयर) मिलाएं।
- पलेवा करें और 2-3 बार जुताई कर खेत समतल करें।
उन्नत किस्में
कुछ प्रमुख उत्पादक किस्में हैं:
- इंड्रा F1
- अरिकाविक F1
- भारती
- कैलिफोर्निया वंडर
यह किस्में रोग प्रतिरोधक और अधिक उत्पादन देने वाली होती हैं।
बीज बुवाई और नर्सरी प्रबंधन
- बीज मात्रा: 200-300 ग्राम प्रति हेक्टेयर
- नर्सरी में बीजों को 1 से 1.5 सेमी गहराई में बोया जाता है।
- अंकुरण के 30-35 दिनों बाद मुख्य खेत में रोपाई की जाती है।
- कतार से कतार की दूरी: 60 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 45 सेमी
सिंचाई और पोषण प्रबंधन
सिंचाई:
- बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें।
- गर्मियों में 5-6 दिन और सर्दियों में 8-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
- ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे उपयुक्त है।
उर्वरक प्रबंधन:
- नाइट्रोजन: 100 किग्रा/हेक्टेयर
- फॉस्फोरस: 60 किग्रा/हेक्टेयर
- पोटाश: 60 किग्रा/हेक्टेयर
यह खादें दो या तीन हिस्सों में विभाजित करके देनी चाहिए।
कीट एवं रोग नियंत्रण
गोल मिर्च में आमतौर पर दिखने वाले रोग:
- झुलसा रोग
- फफूंदी
- वायरस जनित रोग (मोजैक)
बचाव:
- नीम आधारित जैविक कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
- रोगी पौधों को तुरंत हटा दें।
कटाई और उपज
गोल मिर्च की फसल रोपाई के लगभग 60-70 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। एक पौधे से औसतन 1 से 1.5 किलोग्राम मिर्च मिल सकती है।
उपज:
- खुली खेती में: 200-250 क्विंटल/हेक्टेयर
- पॉलीहाउस में: 300-350 क्विंटल/हेक्टेयर
आमदनी और मुनाफा
गोल मिर्च की फसल लागत की तुलना में अधिक आमदनी देती है। यदि किसान पॉलीहाउस विधि अपनाते हैं, तो लागत थोड़ी अधिक होती है लेकिन उत्पादन दोगुना हो जाता है।
उदाहरण:
- एक हेक्टेयर में लागत: ₹60,000 – ₹80,000
- आय: ₹2 लाख – ₹3.5 लाख
- शुद्ध लाभ: ₹1.5 लाख – ₹2.5 लाख
निष्कर्ष: मुनाफा, पोषण और निर्यात की संभावना
गोल मिर्च की खेती न केवल स्थानीय बाजारों बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मांग वाली फसल बन चुकी है। इसमें पोषण, रंग और स्वाद के साथ-साथ किसानों को उच्च आमदनी का मौका भी मिलता है। यदि वैज्ञानिक तकनीकों और अच्छे प्रबंधन के साथ यह फसल ली जाए, तो यह किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती है।
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