भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में संचालित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को खत्म करने के लिए एक सटीक और गुप्त सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया। अत्याधुनिक तकनीकों, ड्रोन, विशेष बलों और खुफिया जानकारी के आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, जिससे भारत की सैन्य क्षमता वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित हुई।
हालांकि, इस अभियान के बाद वैश्विक स्तर पर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ— “अमेरिका अब भी पाकिस्तान की मदद क्यों कर रहा है?”
अमेरिका-पाकिस्तान संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
शीत युद्ध और सामरिक गठजोड़
भारत ने 1947 के बाद गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई, जबकि पाकिस्तान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों से सामरिक सहयोग बढ़ाया। पाकिस्तान CENTO और SEATO जैसे गुटों में शामिल हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान को सोवियत संघ के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोहरे के रूप में देखा और उसे सैन्य-आर्थिक सहायता प्रदान की।
1971 भारत-पाक युद्ध में अमेरिका का पक्षपात
जब भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए सैन्य कार्रवाई की, तब अमेरिका ने पाकिस्तान के पक्ष में USS Enterprise को बंगाल की खाड़ी में तैनात किया। हालांकि, भारत-सोवियत मित्रता ने इस दबाव को निष्फल कर दिया।
अफगानिस्तान युद्ध और पाकिस्तान की भूमिका
ऑपरेशन साइक्लोन (1979–1989)
सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान अमेरिका ने “ऑपरेशन साइक्लोन” के तहत पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए ताकि वह अफगान मुजाहिदीन को प्रशिक्षित कर सके। ISI और CIA ने मिलकर इस ऑपरेशन को संचालित किया।
9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ युद्ध
अमेरिका ने पाकिस्तान को “मुख्य गैर-NATO सहयोगी” का दर्जा दिया और भारी आर्थिक मदद दी। लेकिन ISI द्वारा तालिबान और अन्य आतंकी संगठनों को पनाह देने की रिपोर्ट्स बार-बार सामने आती रहीं।
ऑपरेशन सिंदूर 2025: भारत की बदलती रणनीति
अभियान का उद्देश्य और तकनीकी श्रेष्ठता
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है। इसका उद्देश्य न केवल आतंकी ठिकानों को खत्म करना था, बल्कि पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना भी था कि भारत अब निर्णायक कार्रवाई में यकीन रखता है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और अमेरिका की चुप्पी
अमेरिका ने संयम की अपील करते हुए एक संतुलित बयान दिया। न भारत की प्रशंसा की, न पाकिस्तान की आलोचना। भारत ने स्पष्ट किया कि यह आत्मरक्षा का संवैधानिक अधिकार है।
अमेरिका अब भी पाकिस्तान को मदद क्यों देता है?
सामरिक और भू-राजनीतिक कारण
चीन को संतुलित करने की रणनीति
- चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका पाकिस्तान को चीन की पूर्ण गोद में जाने से रोकना चाहता है।
अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच
- पाकिस्तान, अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने का प्रवेश द्वार है। मध्य एशिया में किसी भी रणनीतिक नीति के लिए पाकिस्तान जरूरी बना हुआ है।
परमाणु हथियारों की सुरक्षा
- पाकिस्तान के पास असुरक्षित परमाणु भंडार है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखे जाएं ताकि उस पर नियंत्रण बना रहे और आतंकवादी तत्व इन्हें न हथिया सकें।
आर्थिक सहायता और IMF की भूमिका
अमेरिका और IMF के माध्यम से आर्थिक समर्थन
- 1948 से अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान को लगभग 33 अरब डॉलर की सहायता दी है। IMF और अन्य संस्थाओं के जरिए आर्थिक समर्थन अब भी जारी है।
- 2025 में IMF ने पाकिस्तान के साथ चल रहे Extended Fund Facility (EFF) की पहली समीक्षा पूरी की, जिसके तहत पाकिस्तान को $1 अरब (SDR 760 मिलियन) की राशि जारी की गई।
Resilience and Sustainability Facility (RSF)
- इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पाकिस्तान को $1.4 अरब (SDR 1 बिलियन) की सहायता मिली।
- इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी, जल संसाधन प्रबंधन और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति: IMF की रिपोर्ट के अनुसार
| सूचकांक | अनुमानित स्थिति |
|---|
| GDP वृद्धि | 2.6% |
| महंगाई दर | 5.1% |
| प्राथमिक अधिशेष | 2.1% GDP |
| विदेशी मुद्रा भंडार | $13.9 अरब |
| बेरोजगारी दर | 8% |
| चालू खाता घाटा | -0.1% GDP |
| FDI | 0.5% GDP |
| सार्वजनिक ऋण | 73.6% GD |
भारत-अमेरिका संबंध: बदलता समीकरण
सामरिक सहयोग में बढ़ोतरी
QUAD, इंडो-पैसिफिक रणनीति और रक्षा साझेदारी ने भारत को अमेरिका के लिए अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत की वैश्विक कूटनीतिक और आर्थिक स्थिति अब अमेरिका को अधिक आकर्षित कर रही है।
अमेरिका की दोहरी नीति या रणनीतिक विवशता?
अमेरिका पाकिस्तान पर प्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन सहायता कम करता जा रहा है। बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से नियंत्रित करने की रणनीति अपनाई थी, जिससे भारत की चिंता को भी आंशिक रूप से कम किया जा सके।
निष्कर्ष: भारत की नीति निर्धारक भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर 2025 भारत की रणनीतिक सोच में आए बदलाव का प्रतीक है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही मदद का आधार न तो भावनात्मक है और न ही पक्षपातपूर्ण — यह शुद्ध भू-राजनीतिक विवशता और सामरिक गणना का हिस्सा है।
भविष्य की दिशा के लिए भारत को चाहिए कि:
- अमेरिका के साथ सामरिक साझेदारी को और गहराए।
- पाकिस्तान की दोहरी नीति और आतंकवाद समर्थन को वैश्विक मंच पर लगातार उजागर करता रहे।
- वैश्विक मंचों पर नीति निर्धारक राष्ट्र के रूप में भूमिका निभाए।
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