इतिहास क्या कहता है: अब तक के युद्धों में किसने किसका साथ दिया?
1947-48 का युद्ध:
- यह पहला भारत-पाक युद्ध था, जिसमें पाकिस्तान ने कबायली लड़ाकों के ज़रिए कश्मीर पर हमला किया।
- भारत को ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र का नैतिक समर्थन मिला, लेकिन कोई सैन्य समर्थन नहीं।
- पाकिस्तान को उस समय किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय समर्थन की पुष्टि नहीं थी।
1965 का युद्ध:
- पाकिस्तान ने ऑपरेशन जिब्राल्टर के तहत कश्मीर में घुसपैठ की थी।
- अमेरिका और ब्रिटेन ने दोनों देशों को हथियार आपूर्ति रोक दी।
- सोवियत संघ (अब रूस) ने युद्ध के बाद ताशकंद समझौते में मध्यस्थता की और भारत के पक्ष में एक स्थिर दृष्टिकोण अपनाया।
1971 का युद्ध (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम):
- भारत ने बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) को आज़ाद कराने में निर्णायक भूमिका निभाई।
- सोवियत संघ ने भारत का खुलकर समर्थन किया, और अमेरिका द्वारा भेजे गए 7th फ्लीट को रोकने में कूटनीतिक भूमिका निभाई।
- अमेरिका और चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया, लेकिन सीधे हस्तक्षेप नहीं किया।
1999 – करगिल युद्ध:
- पाकिस्तान की सेना ने LOC पार कर घुसपैठ की।
- अमेरिका ने भारत के पक्ष में कूटनीतिक समर्थन दिया और पाकिस्तान को पीछे हटने को मजबूर किया।
- चीन ने तटस्थ रुख अपनाया, पाकिस्तान के समर्थन में सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया।
वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य: यदि आज युद्ध हो तो कौन देगा साथ?
भारत के संभावित सहयोगी देश
अमेरिका (USA)
- भारत और अमेरिका के संबंध पिछले दशक में काफी मजबूत हुए हैं।
- क्वाड (QUAD), COMCASA, BECA जैसे समझौते अमेरिका को भारत के लिए तकनीकी और खुफिया समर्थन देने की क्षमता देते हैं।
रूस (Russia)
- पारंपरिक सहयोगी; भले ही रूस पाकिस्तान से रक्षा डील कर रहा हो, लेकिन भारत उसकी प्राथमिकता है।
- युद्ध में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं, लेकिन डिप्लोमैटिक व सप्लाई लाइन सपोर्ट संभव है।
फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया
- फ्रांस राफेल जैसे रक्षा सौदों के कारण भारत के करीब है।
- जापान और ऑस्ट्रेलिया क्वाड सहयोग के अंतर्गत भारत के रणनीतिक भागीदार हैं।
पाकिस्तान के संभावित सहयोगी देश
चीन (China)
- चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी है।
- चीन हथियार, ड्रोन, खुफिया तकनीक और आर्थिक मदद दे सकता है, पर सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगा।
तुर्की (Turkey)
- तुर्की ने कई बार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है।
- तुर्की से कूटनीतिक समर्थन संभव है, सैन्य सहयोग सीमित रहेगा।
इस्लामिक देश (सऊदी अरब, ईरान, UAE)
- सऊदी और UAE भारत के साथ भी मजबूत आर्थिक संबंध रखते हैं, इसलिए तटस्थ रह सकते हैं।
- ईरान पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करता है, लेकिन भारत के साथ भी संतुलन बनाए रखता है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियाँ
संयुक्त राष्ट्र (UN)
- UN का लक्ष्य युद्ध रोकना है। वह युद्ध की स्थिति में कूटनीतिक दबाव बनाएगा।
- अमेरिका, रूस, चीन—तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
यूरोपीय संघ (EU)
- EU के देश शांति समर्थक होते हैं। वे भारत के पक्ष में कूटनीतिक समर्थन दे सकते हैं, खासकर आतंकवाद और मानवाधिकार के मसले पर।
निष्कर्ष: किसका साथ किसे मिलेगा?
- भारत को अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से रणनीतिक, तकनीकी और कूटनीतिक समर्थन मिलने की संभावना अधिक है।
- पाकिस्तान को चीन और तुर्की जैसे देशों से सीमित सैन्य और कूटनीतिक समर्थन मिल सकता है।
- इस्लामिक देश, संयुक्त राष्ट्र, और यूरोपीय देश मुख्यतः तटस्थ रहेंगे और शांति वार्ता को प्राथमिकता देंगे।
Read More
- भारत में 32 हवाईअड्डों और 25 एयर रूट्स पर अस्थायी रूप से सिविल उड़ानें निलंबित
- Ayodhya News: रामलला की सेवा में लगे कूलर और खास भोग
- IMF ने पाकिस्तान के लिए EFF की पहली समीक्षा पूरी की, 1.4 अरब डॉलर के
- UP News: फर्जी खबरों पर ध्यान न दें… भारत-पाक तनाव के बीच अखिलेश यादव की
- IPL 2025 हुआ सस्पेंड, अब कब खेले जाएंगे बचे हुए मैच?
Discover more from अपना रण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

