गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल बड़े हर्ष और उत्साह से मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 2025 का त्योहार 27 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है, इसलिए इस दिन विशेष पूजा-अर्चना का महत्व होता है।
रणथंभौर का ऐतिहासिक गणेश मंदिर
राजस्थान का रणथंभौर किला जहां अपनी शेरों और जंगल सफारी के लिए मशहूर है, वहीं यह जगह 700 साल पुराने गणेश मंदिर के कारण भी खास पहचान रखती है। यह मंदिर हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।
मंदिर की प्राचीन कथा
किंवदंती के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास 1299 ईस्वी से जुड़ा हुआ है। उस समय राजा हम्मीर ने अलाउद्दीन खिलजी के खिलाफ रणथंभौर में युद्ध लड़ा था। लंबे समय तक युद्ध चलते-चलते किले के भीतर भोजन का संकट खड़ा हो गया। राजा हम्मीर और प्रजा बेहद चिंतित हो उठे।
चमत्कारिक घटना
कहा जाता है कि अगली सुबह एक अद्भुत चमत्कार हुआ। किले के भीतर अचानक त्रिनेत्र (तीन नेत्रों वाले) भगवान गणेश की मूर्ति प्रकट हुई। इस चमत्कार के बाद राजा के गोदाम अन्न से भर गए और संकट टल गया। तभी से रणथंभौर किले में स्थित इस मंदिर की पूजा शुरू हुई।
क्यों खास है रणथंभौर गणेश मंदिर?
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश की पूजा सिर्फ व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ की जाती है। भक्त यहां अपने पूरे परिवार के नाम से पत्र लिखकर भगवान गणेश को भेजते हैं। मान्यता है कि बप्पा हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं।
गणेश चतुर्थी और रणथंभौर मंदिर का संबंध
गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और त्रिनेत्र गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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