Independence Day Special: क्यों गोवा 19 दिसंबर को मनाता है अपना आजादी का दिन
क्यों 1947 में आजाद भारत का हिस्सा बनने के लिए गोवा को 14 साल इंतजार करना पड़ा
15 अगस्त और गोवा की अलग आजादी की कहानी
भारत में हर साल 15 अगस्त को Independence Day पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। गोवा में भी इस दिन तिरंगा फहराया जाता है और देशभक्ति के कार्यक्रम होते हैं, लेकिन गोवा के लिए असली ‘आजादी का दिन’ 19 दिसंबर है। इस दिन को Goa Liberation Day के रूप में मनाया जाता है।
कारण यह है कि 15 अगस्त 1947 की रात जब भारत अंग्रेजों के शासन से मुक्त हुआ, तब भी गोवा पर पुर्तगाल का उपनिवेशी शासन कायम था।
1510 से चला आ रहा पुर्तगाली शासन
गोवा 1510 से पुर्तगाली उपनिवेश था, यानी अंग्रेजों के भारत आने से लगभग 90 साल पहले ही यहां यूरोपीय शासन स्थापित हो गया था।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी गोवा पुर्तगाल के कब्जे में ही रहा। 1947 में भारत की आजादी के बाद भी पुर्तगाल ने यहां से सत्ता छोड़ने से साफ इनकार कर दिया।
14 साल का लंबा इंतजार और असफल वार्ताएं
19वीं और 20वीं सदी में गोवा से पुर्तगालियों को निकालने के लिए कई विद्रोह हुए, लेकिन ये आंदोलन देश के बाकी हिस्सों की तरह संगठित और व्यापक नहीं हो सके।
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुर्तगाल से कई बार शांति वार्ता की, लेकिन हर बार नाकामी हाथ लगी।
आखिरकार, यह साफ हो गया कि गोवा को मुक्त करने के लिए सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र उपाय है।
ऑपरेशन विजय – 36 घंटे में मिली आजादी
18 दिसंबर 1961 को भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से Operation Vijay शुरू किया।
गोवा में उस समय केवल 3,300 पुर्तगाली सैनिक थे, जो भारतीय सेनाओं की ताकत के सामने ज्यादा देर नहीं टिक पाए।
18 दिसंबर की शाम पुर्तगाल के गवर्नर जनरल मैनुअल एंटोनियो वासालो-ए-सिल्वा ने आत्मसमर्पण कर दिया और सचिवालय में पुर्तगाली झंडा उतारकर सफेद झंडा फहराया गया।
तिरंगे का लहराना और शहीदों की याद
19 दिसंबर 1961 की सुबह मेजर जनरल के.पी. कांडेत ने सचिवालय पर भारतीय तिरंगा फहराया। यह पल गोवा के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गया।
इस अभियान में भारतीय नौसेना के INS Gomantak पर तैनात सात नाविकों समेत कई सैनिक शहीद हुए। उनकी स्मृति में एक युद्ध स्मारक भी बनाया गया है।
गोवा में 19 दिसंबर का महत्व
आज भी गोवा में गोवा मुक्ति दिवस पूरे जोश और गर्व के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल राज्य की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि भारत में उसके विलय और एकता की कहानी भी बयां करता है।
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