मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में ‘ब्लू कार्बन परियोजना’ पर एक लिखित प्रश्न पूछा गया। इसके जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इसका विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया। आइए, समझते हैं कि आखिर ब्लू कार्बन क्या है और यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है।
ब्लू कार्बन क्या है?
“ब्लू कार्बन” शब्द का मतलब है – समुद्री और तटीय पारिस्थितिक तंत्र में संग्रहित वह कार्बन जो पौधों और मिट्टी के माध्यम से लंबे समय तक संरक्षित रहता है। इसमें मुख्य रूप से मैंग्रोव, समुद्री घास (Seagrass) और ज्वारीय दलदली भूमि (Tidal Marshes) शामिल हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र न केवल कार्बन को अवशोषित करते हैं, बल्कि समुद्री जीवन के लिए आवास भी प्रदान करते हैं।
ब्लू कार्बन का महत्व
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: ब्लू कार्बन इकोसिस्टम वातावरण से CO₂ को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन को धीमा करता है।
- समुद्री जैव विविधता का संरक्षण: यह समुद्री जीवों के लिए सुरक्षित और समृद्ध आवास प्रदान करता है।
- तटीय सुरक्षा: मैंग्रोव और ज्वारीय दलदल समुद्री लहरों और तूफानों से तटों की रक्षा करते हैं।
भारत की ब्लू कार्बन परियोजना
भारत सरकार ने ब्लू कार्बन परियोजना को शुरू किया है ताकि तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव, समुद्री घास और दलदली भूमि का संरक्षण और पुनर्स्थापन किया जा सके।
- मुख्य उद्देश्य:
- ब्लू कार्बन इकोसिस्टम की मैपिंग और निगरानी।
- संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजनाएं लागू करना।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में शामिल करना।
- ब्लू कार्बन इकोसिस्टम की मैपिंग और निगरानी।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: इस परियोजना के तहत सैटेलाइट डेटा, जियोस्पेशियल तकनीक और फील्ड सर्वे का उपयोग करके समुद्री कार्बन स्टॉक्स का आकलन किया जाएगा।
निष्कर्ष
ब्लू कार्बन परियोजना केवल पर्यावरण संरक्षण का कदम नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। मैंग्रोव और समुद्री घास जैसे इकोसिस्टम न सिर्फ धरती को हरित बनाए रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्थिर तटीय पर्यावरण भी सुनिश्चित करते हैं।
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