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जानिए क्या है डूमस्क्रॉलिंग?

आज की डिजिटल दुनिया में लोग पहले से अधिक जानकारी पा सकते हैं, लेकिन यह सुविधा एक जाल भी बन चुकी है — डूमस्क्रॉलिंग का जाल। यह एक ऐसी आदत है जिसमें व्यक्ति बार-बार सोशल मीडिया या समाचार प्लेटफॉर्म्स पर नकारात्मक खबरें पढ़ता जाता है, खासकर संकट के समय। भले ही लोग सोचें कि यह अपडेट रहने का जरिया है, लेकिन असल में यह मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से नुकसान पहुंचा रहा है।

डूमस्क्रॉलिंग का असली अर्थ

डूमस्क्रॉलिंग वह व्यवहार है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर नकारात्मक खबरें पढ़ता जाता है, भले ही वह जानता हो कि इससे मानसिक तकलीफ बढ़ रही है। यह एक नशे की तरह काम करता है क्योंकि हर नई खबर पढ़ने पर मस्तिष्क को डोपामिन (इनाम देने वाला न्यूरोट्रांसमीटर) मिलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इस व्यवहार को मजबूती देते हैं क्योंकि नकारात्मक जानकारी लोगों का ज्यादा ध्यान खींचती है।

मस्तिष्क डूमस्क्रॉलिंग पर कैसे प्रतिक्रिया देता है?

तनाव की प्रतिक्रिया (Stress Response)

मस्तिष्क में “नकारात्मकता की प्राथमिकता” (Negativity Bias) होती है। यह एक प्राचीन सुरक्षा तंत्र है जो खतरे पर ज्यादा ध्यान देता है। लगातार नकारात्मक खबरें पढ़ने से कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन अत्यधिक स्रावित होते हैं। इससे शरीर और मस्तिष्क लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रहते हैं, जिससे चिंता, थकान, चिड़चिड़ापन, याददाश्त और एकाग्रता की समस्याएं होती हैं।

डोपामिन रश और नशा

हर बार जब आप नई जानकारी पढ़ते हैं, तो डोपामिन निकलता है। यह एक फीडबैक लूप बनाता है – आप नकारात्मक खबर पढ़ते हैं, एक इनाम जैसा अहसास होता है, और फिर और पढ़ने की इच्छा जागती है।

भावनात्मक नियंत्रण में बाधा

लगातार नकारात्मक कंटेंट देखने से मस्तिष्क का एमिगडाला सक्रिय हो जाता है, जो खतरे की पहचान करता है। इससे व्यक्ति छोटी बातों पर भी ज्यादा भावनात्मक प्रतिक्रिया देने लगता है और रोजमर्रा के तनाव को संभालना मुश्किल हो जाता है।

निर्णय लेने की क्षमता में कमी

लगातार तनाव में रहने से प्रि-फ्रंटल कॉर्टेक्स (जो तार्किक सोच और निर्णय लेने का हिस्सा है) प्रभावित होता है। इससे व्यक्ति जल्दबाजी में निर्णय, ध्यान की कमी और योजना बनाने में कठिनाई महसूस करता है।

नींद में खलल

सोने से पहले डूमस्क्रॉलिंग मस्तिष्क को अधिक सक्रिय कर देता है और नीली रोशनी मेलाटोनिन (नींद के लिए जरूरी हार्मोन) के स्तर को कम करती है। इससे नींद चक्र बिगड़ता है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जो आगे चलकर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को और कम कर देती है।

चिंता और डिप्रेशन

शोधों से पता चला है कि नकारात्मक खबरों की अधिक खपत का सीधा संबंध डिप्रेशन और एंग्जायटी से होता है, खासकर वैश्विक संकट की स्थितियों में।

संवेदनहीनता (Desensitisation)

अगर कोई व्यक्ति बार-बार त्रासदी से जुड़ी खबरें पढ़ता है, तो धीरे-धीरे उसमें सहानुभूति की भावना कम होने लगती है और वह असहायता का अनुभव करने लगता है।

निष्कर्ष और सावधानी

डूमस्क्रॉलिंग केवल एक आदत नहीं बल्कि मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक खतरनाक जहर है। वर्ल्ड ब्रेन डे 2025 के अवसर पर यह जरूरी है कि हम अपने डिजिटल व्यवहार की समीक्षा करें और स्वस्थ मानसिक जीवन के लिए सोशल मीडिया पर बिताए समय को सीमित करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या के लिए विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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