बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए जितना राहत लेकर आता है, उतना ही सावधानी का भी समय होता है। इस दौरान गाय-भैंसों में लंगड़ा बुखार (Lameness Fever) या पैरों में सूजन व चलने-फिरने में तकलीफ जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। यह एक गंभीर पशु रोग है, जो समय पर इलाज न होने पर पशु की उत्पादकता घटा सकता है।
लंगड़ा बुखार क्या है?
लंगड़ा बुखार एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो अधिकतर गाय और भैंस में बरसात के मौसम में पाया जाता है। यह रोग बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण, गंदगी, नमी और कीचड़ में खड़े रहने के कारण फैलता है। इस रोग में पशु के पैरों में तेज दर्द, सूजन और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
लंगड़ा बुखार के प्रमुख लक्षण
- अचानक लंगड़ाना या चलने में परेशानी
- पैरों या जोड़ों में सूजन और गर्माहट
- तेज़ बुखार आना
- चारा खाने में रुचि न लेना
- थनों या शरीर के अन्य भागों में भी सूजन
यदि इन लक्षणों को समय पर न पहचाना जाए तो पशु की हालत बिगड़ सकती है।
इस बीमारी के होने के कारण
गंदे और कीचड़ भरे स्थान में खड़ा रहना
- बरसात के कारण पशुशालाओं में पानी भर जाना या दलदल बन जाना आम बात है, जो संक्रमण का मुख्य कारण बनता है।
खुरों की नियमित सफाई न होना
- पैरों में गंदगी और नमी बनी रहने से बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन जल्दी हो जाता है।
पोषण की कमी
- कमज़ोर इम्युनिटी और कैल्शियम की कमी से पशु रोग का जल्दी शिकार होते हैं।
कैसे करें लंगड़ा बुखार से बचाव?
पशुशाला को सूखा और साफ रखें
- बरसात में कीचड़ न बनने दें। पुआल या चूने का छिड़काव करें जिससे नमी कम हो।
खुरों की नियमित सफाई करें
- पशुओं के पैरों को हर दिन साफ पानी से धोएं और सुखाएं। हफ्ते में एक बार पोटाश के गुनगुने पानी में पैर डुबोना फायदेमंद होता है।
संतुलित आहार दें
- पशु के भोजन में खनिज, विटामिन और कैल्शियम शामिल करें जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।
रोगग्रस्त पशु को अलग रखें
- अगर कोई पशु बीमार हो गया है तो उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग रखें और पशु चिकित्सक से परामर्श लें।
समय पर टीकाकरण और दवा
- बरसात से पहले या मौसम के दौरान पशु को डॉक्टर द्वारा बताई गई रोगनिरोधक दवा दें।
घरेलू नुस्खे (प्रारंभिक लक्षण में)
- हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर पैरों पर हल्के हाथ से मालिश करें।
- गुनगुने पानी से सिकाई करें ताकि सूजन कम हो सके।
- नीम की पत्तियों का उबाला पानी पैर धोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
(नोट: ये उपाय शुरुआती लक्षणों में उपयोगी हैं। गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।)
निष्कर्ष
बरसात के मौसम में गाय-भैंसों को लंगड़ा बुखार जैसी बीमारियों से बचाना हर पशुपालक की जिम्मेदारी है। थोड़ी सी सावधानी, साफ-सफाई और समय पर देखभाल से आप अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं और उनकी दूध उत्पादन क्षमता को बनाए रख सकते हैं। याद रखें, स्वस्थ पशु ही समृद्धि की असली पूंजी है।
Disclaimer:
यह जानकारी पशु चिकित्सा रिपोर्टों और अनुभवजन्य उपायों पर आधारित है। किसी भी उपचार को अपनाने से पहले पशु चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहेगा।
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