NITI AYOG 1

नीति आयोग के ग्रामीण विकास प्रभाग द्वारा ‘ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार नीति आयोग के मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें नीतिनिर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, तकनीकी प्रदाताओं और जमीनी स्तर के उद्यमियों ने भाग लिया।

ग्रामीण सूक्ष्म उद्यम: समावेशी विकास का इंजन

सेमिनार में ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों को समावेशी आर्थिक विकास का आधार बताया गया। इस दौरान यह चर्चा हुई कि कैसे ये उद्यम क्षेत्रीय विषमताओं को कम करने और स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सुझाव दिए गए कि:

  • नीतिगत ढांचा सरल और अनुकूल बनाया जाए।
  • सस्ती और सुलभ ऋण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • Open Network for Digital Commerce (ONDC) जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार कर डिजिटल और बाजार पहुंच को बढ़ाया जाए।

महिला उद्यमिता पर विशेष फोकस

एक विशेष सत्र महिला भागीदारी पर केंद्रित था, जिसमें ‘लखपति दीदी’ जैसी ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों को साझा किया गया।
इसमें बताया गया कि Women Entrepreneurship Platform (WEP) महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के विस्तार में एक प्रमुख माध्यम बन चुका है।

वित्तीय नवाचार और CSR की भूमिका

विशेषज्ञों ने ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए:

  • ब्लेंडेड फाइनेंस मॉडल को अपनाना
  • संस्थागत सहयोग और CSR फंड का उपयोग
  • निजी क्षेत्र और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़ाव

इसके अलावा, यह भी कहा गया कि सरकारी योजनाओं का समन्वय और स्थानीय संस्थाओं का क्षमता निर्माण जरूरी है।

नवाचार और सतत विकास का संगम

समापन सत्र में युवा परिवर्तनकर्ताओं और ग्रीन एंटरप्राइज लीडर्स ने प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नवाचार, स्थिरता और ग्रामीण विकास अब परस्पर जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष: ग्रामीण भारत के केंद्र में उद्यमी

सेमिनार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि ग्रामीण उद्यमियों, विशेषकर महिलाओं को भारत की विकास गाथा के केंद्र में रखने की आवश्यकता को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया।

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