उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश) में आयोजित ‘एग्री-इंडस्ट्री कॉन्क्लेव’ में कहा कि किसानों की वास्तविक आय में वृद्धि तब ही संभव है जब सभी प्रकार की सरकारी सहायता प्रत्यक्ष रूप से उनके खातों में भेजी जाए। उन्होंने बताया कि अमेरिका जैसे देशों में किसान परिवारों की औसत आय सामान्य परिवारों से अधिक है, जिसका एक मुख्य कारण सीधे सरकारी सहायता है।
“भारत में उर्वरक और अन्य सब्सिडी अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से मिलती हैं। यदि इन्हें सीधे किसानों को दिया जाए, तो हर किसान को कम से कम ₹35,000 वार्षिक मिल सकते हैं।”
कृषि: केवल अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उद्योग से जुड़ा क्षेत्र
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि इसका गहरा संबंध उद्योग से है। उन्होंने कहा कि भारत की आधी आबादी कृषि पर निर्भर है और कृषि को उद्योग से जोड़कर देश को आर्थिक समृद्धि की ओर ले जाया जा सकता है।
आतंकवाद पर भारत का सख्त रुख: ऑपरेशन सिंदूर की सराहना
उद्घाटन समारोह में उन्होंने भारतीय सेना की बहादुरी की प्रशंसा की और कहा कि आज का भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने बहावलपुर और मुरिदके में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर सटीक हमले किए।
“प्रधानमंत्री ने दुनिया को संदेश दिया कि जो सिंदूर मिटाते हैं, उन्हें धरती पर जीने का अधिकार नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि अब भारत को अपने साहसिक निर्णयों के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि दुनिया ने खुद परिणाम देखे हैं।
भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
श्री धनखड़ ने आर्थिक प्रगति की बात करते हुए कहा कि पिछले दशक में भारत ने वैश्विक स्तर पर बड़ी छलांग लगाई है। आज भारत फ्रांस, इंग्लैंड और जापान को पछाड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।
एग्री-उद्यमिता को मिले बढ़ावा: बने ‘एग्रिप्रेन्योर’
उपराष्ट्रपति ने किसानों से आग्रह किया कि वे खुद को ‘एग्रिप्रेन्योर’ (Agri-Entrepreneur) के रूप में विकसित करें। उन्होंने कहा कि किसानों को न सिर्फ उत्पादन करना चाहिए बल्कि उत्पाद का मूल्य संवर्धन, विपणन और उद्यम भी संभालना चाहिए।
“देश में 730 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) और ICAR के अंतर्गत कई संस्थान हैं जो अब सक्रिय हो चुके हैं। इनका उपयोग किसानों को उद्योग और व्यापार से जोड़ने में होना चाहिए।”
उन्होंने सांसदों, विधायकों और NGOs से आग्रह किया कि वे गांवों को गोद लें और उन्हें कृषि-आधारित उद्योगों से जोड़ें।
दुग्ध, सब्ज़ी और फल क्षेत्र में भारत बनेगा अग्रणी: सीएम की पहल की सराहना
उपराष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव की दुग्ध, सब्ज़ी और फलों के क्षेत्र में की गई पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश का किसान अब सिर्फ दूध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दही, छाछ, आइसक्रीम और रसगुल्ला जैसे उत्पादों का भी उत्पादन करेगा।
“नए टेक्नोलॉजी और नयी सोच के साथ हमारा किसान अब पीछे नहीं हटेगा। यदि किसान उद्योग में आए, तो भारत 2047 से पहले ही विकसित राष्ट्र बन सकता है।”
निष्कर्ष
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का यह भाषण भारत के कृषक-केन्द्रित विकास, आतंकवाद के प्रति कठोर नीति, और अर्थव्यवस्था में भारत की तेजी का स्पष्ट संकेत देता है। कृषि को उद्योग से जोड़कर, प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण को सुनिश्चित कर, और किसानों को उद्यमी बनाकर ही विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है।
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