भारत में कई सब्जियां औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, लेकिन कुछ सब्जियां इतनी ताकतवर होती हैं कि उन्हें मांसाहार का विकल्प तक माना जाता है। सूरन (Jimikand) ऐसी ही एक सब्जी है, जिसे “शाकाहारी मटन” भी कहा जाता है। खासतौर पर इसकी गजेंद्र किस्म खेती के लिए बेहद लोकप्रिय और मुनाफेदार है।
क्यों खास है सूरन की गजेंद्र किस्म?
- यह एक वन प्रजाति की किस्म है – बहुत मजबूत और रोगप्रतिरोधक
- खाद और उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती
- जलवायु और भूमि की परिस्थितियों के प्रति सहनशील
- बाजार में भारी डिमांड
- सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी – पाचन, ऊर्जा और बलवर्धक
अप्रैल में करें बुवाई, सर्दियों में होगी बंपर कमाई
- बुवाई का समय: अप्रैल
- कटाई का समय: 6 महीने (अक्टूबर–नवंबर तक फसल तैयार)
- डिमांड: ठंड के मौसम में सूरन की मांग तेजी से बढ़ती है
- उपयोग: सब्जी, अचार, औषधि और प्रसंस्कृत उत्पादों में
सूरन की गजेंद्र किस्म की खेती कैसे करें?
1. खेत की तैयारी
- एक या दो बार गहरी जुताई करें
- मिट्टी को भुरभुरी और समतल बनाएं
- खेत की अच्छी जल निकासी व्यवस्था जरूरी है
2. उपयुक्त मिट्टी
- दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पानी न ठहरे
- पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच हो तो सर्वोत्तम
3. बुवाई विधि
- बीज या कंद के टुकड़े से बुवाई करें
- कंद के टुकड़े 250-500 ग्राम वजन के हों
- पंक्ति से पंक्ति दूरी: 60-75 सेमी
- पौधे से पौधे दूरी: 45-60 सेमी
4. सिंचाई और देखभाल
- फसल की नमी बनाए रखने के लिए जरूरत अनुसार सिंचाई
- बरसात में सिंचाई की जरूरत नहीं
- निराई-गुड़ाई और खेत की सफाई करें
- रोग और कीट प्रबंधन की अधिक आवश्यकता नहीं
कितनी होगी कमाई?
| विवरण | अनुमानित मात्रा |
|---|---|
| प्रति एकड़ उपज | 20–25 टन सूरन कंद |
| बाजार भाव (औसतन) | ₹18–₹20 प्रति किलो |
| कुल आमदनी | ₹4–4.5 लाख प्रति एकड़ |
| लागत (कम से कम) | ₹40,000–₹50,000 प्रति एकड़ |
| शुद्ध लाभ | ₹3.5–4 लाख प्रति एकड़ तक |
निष्कर्ष:
सूरन की गजेंद्र किस्म उन किसानों के लिए स्वर्णिम अवसर है जो कम लागत में अधिक आमदनी चाहते हैं। इसकी खेती में उर्वरक, कीटनाशक या ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती, और बाजार में डिमांड इतनी है कि व्यापारी खेत से ही खरीद कर ले जाते हैं। इसे सही समय पर उगाएं और अप्रैल से नवंबर तक की मेहनत में लाखों की कमाई पाएं।
अब वक्त है शाकाहारी मटन से खेती की दिशा बदलने का!
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