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गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल-मई का समय गन्ने की बुवाई के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान इस समय को “बंपर उत्पादन” के अवसर के रूप में देखते हैं। यदि सही किस्मों का चयन और ट्रेंच विधि से बुवाई की जाए, तो कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

15 अप्रैल से 31 मई तक करें बसंतकालीन बुवाई

बसंतकालीन गन्ने की बुवाई का दूसरा मौका 15 अप्रैल से 31 मई तक होता है। इस दौरान बुवाई करने वाले किसान अच्छे मौसम, नमी और संसाधनों का पूरा लाभ उठा सकते हैं। गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली होते हैं और नमी भी बनी रहती है, जो गन्ने की शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद अनुकूल होती है।

गन्ने की बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान

🔹खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाएं।
🔹लाल सड़न रोधी किस्मों का चयन करें।
🔹हाल ही में प्रतिबंधित किस्म को-0238 का उपयोग बिल्कुल न करें।
🔹ऊसर भूमि में विशेष किस्मों का ही चयन करें।

इन गन्ने की किस्मों से मिलेगा अधिक उत्पादन

शीघ्र पकने वाली किस्में:

🔹कोलख 94184, कोलख 9709, कोलख 07201
🔹कोशा 08272, यूपी 05125, कोसे 03234
🔹को 0118, को 98014, कोपीके 05191
🔹कोशा 8436, कोशा 88230, को 0232
🔹कोसे 01235, कोसे 98231, को 05009

मध्य व देर से पकने वाली किस्में:

🔹कोशा 08279, कोसे 01434, कोशा 08276
🔹कोसे 08452, को 05011, को 0124
🔹यूपी 0097, कोपन्त 84212, कोजे 20193
🔹कोसे 96436, को 0233, कोह 128
🔹कोशा 99259, कोसे 11453 आदि

ऊसर भूमि के लिए उपयुक्त किस्में:

🔹यूपी 14234
🔹को.शा. 14233

ये किस्में कम उपजाऊ जमीन में भी अच्छा उत्पादन देती हैं।

बुवाई की सर्वोत्तम विधि – ट्रेंच मेथड

ट्रेंच विधि (Trench Method) से बुवाई करने पर:

🔹पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है
🔹जल संचयन बेहतर होता है
🔹रूट डेवलपमेंट मजबूत होता है
🔹रोग और कीट का प्रभाव कम होता है

ट्रेंच बनाने की प्रक्रिया:

  1. 1 फीट चौड़ी और 20–25 सेमी गहरी नालियां तैयार करें।
  2. नालियों में एक या दो आंख वाले गन्ने के टुकड़े बिछाएं।
  3. टुकड़ों के ऊपर मिट्टी डालकर हल्की सिंचाई करें।
  4. ट्रेंच डिगर या हाथ के औजार से भी ट्रेंच बनाई जा सकती है।

उन्नत तकनीक से मुनाफा कई गुना

यदि किसान सही किस्म, उपयुक्त बुवाई समय और आधुनिक विधि अपनाते हैं, तो उन्हें पारंपरिक खेती के मुकाबले 30–40% अधिक उत्पादन मिल सकता है। साथ ही, गुणवत्ता और चीनी की मात्रा भी बेहतर होती है, जिससे शुगर मिल्स में अच्छा भाव मिलता है।

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