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अगर आप कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल की तलाश में हैं, तो बांस (Bamboo) की खेती आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बांस एक कमर्शियल फसल है, जिसका उपयोग आज के समय में फर्नीचर, सजावटी सामान, चटाई, टोकरियों, बर्तनों से लेकर मकान और खिलौनों तक में हो रहा है। इसके उत्पादों की भारत ही नहीं, विदेशों में भी जबरदस्त डिमांड है।

क्यों करें बांस की खेती?

बांस को “हरा सोना” भी कहा जाता है क्योंकि यह न केवल तेज़ी से बढ़ता है, बल्कि इससे बनने वाले प्रोडक्ट्स की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस का प्रयोग बढ़ रहा है, जिससे इसकी मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

मध्य प्रदेश बना बांस का हब

भारतीय वन संरक्षण रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा बांस क्षेत्र वाला राज्य है। यहां 18,394 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बांस पाया जाता है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश और फिर महाराष्ट्र का स्थान आता है।

50% सब्सिडी और ₹120 प्रति पौधा

मध्य प्रदेश सरकार बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए 50% अनुदान (Subsidy) दे रही है। यानी अगर कोई किसान बांस की खेती करना चाहता है, तो पूरी लागत का केवल आधा हिस्सा ही उसे खुद वहन करना होगा, बाकी का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

इसके साथ ही सरकार हर बांस के पौधे पर ₹120 की आर्थिक सहायता भी दे रही है। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने भी किसानों को बांस की खेती के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का निर्णय लिया था।

नेशनल बैंबू मिशन भी दे रहा सहारा

केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा National Bamboo Mission भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। इसका उद्देश्य बांस आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय के साधन उपलब्ध कराना है।

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