आम के पेड़ों पर फल आने से पहले कीटों और रोगों का हमला हो सकता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इनमें मधुआ कीट और दहिया कीट प्रमुख हैं, जो आम के मंजर (फूलों) को नुकसान पहुंचाते हैं। इन कीटों को रोकने के लिए समय पर सही कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव करना आवश्यक है। इस लेख में हम आम के बौर पर कीटों के हमले को रोकने और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा करेंगे।
बौर आने से पहले करें छिड़काव
आम के बौर (मंजर) विकसित होने से पहले पूरे पेड़ पर पहला छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव न केवल कीटों से सुरक्षा देता है बल्कि फफूंदजनित रोगों को भी नियंत्रित करता है। इस छिड़काव के लिए कीटनाशकों के साथ फफूंदनाशी मिलाना आवश्यक है ताकि मंजर को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाव हो सके।
दूसरा छिड़काव: जब फल सरसों के दाने के बराबर हो
जब आम के छोटे फल सरसों के दाने के आकार के हो जाएं, तब दूसरा छिड़काव करना चाहिए। इस समय कीटों और फफूंदजनित रोगों का हमला बढ़ सकता है, जिससे फसल को नुकसान हो सकता है। इस चरण में कीटनाशक और फफूंदनाशी दोनों का उपयोग करना आवश्यक है, जिससे मधुआ और दहिया कीटों को नियंत्रित किया जा सके।
तीसरा छिड़काव: जब फल मटर के दाने जितने हों
जब आम के फल मटर के दाने के आकार के हो जाएं, तो तीसरा छिड़काव करना जरूरी हो जाता है। इस समय फलों पर कीटों और बीमारियों का हमला अधिक हो सकता है। इस छिड़काव में पहले और दूसरे छिड़काव में उपयोग किए गए कीटनाशकों और फफूंदनाशियों का मिश्रण किया जाता है। साथ ही, अल्फा नेप्थाईल एसीटिक एसिड (4.5% एस.एल.) का उपयोग करना चाहिए, जिससे मंजर और फल झड़ने से बचाए जा सकें।
मधुआ कीट से बचाव के उपाय
मधुआ कीट आम के मंजरों को नुकसान पहुंचाकर फलों की गुणवत्ता खराब करता है। इसके नियंत्रण के लिए निम्नलिखित कीटनाशकों का उपयोग करें:
1. इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस.एल. – 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
2. डाइमेथोएट 30% ई.सी. – 1 मिली प्रति 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
3. थायोमेथाक्साम 25% डब्लू.जी. – 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
दहिया कीट से बचाव के उपाय
दहिया कीट भी आम के पेड़ों को प्रभावित कर सकता है, जिससे फलों की गुणवत्ता गिरती है। इस कीट से बचाव के लिए निम्नलिखित फफूंदनाशकों का उपयोग करें:
1. सल्फर 80% – 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
2. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% – 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
3. कार्बेन्डाजिम 50% – 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
4. हेक्साकोनाजोल 5% एस.सी. – 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
एन्थ्रेकनोज रोग से बचाव
एन्थ्रेकनोज रोग आम के मंजरों को प्रभावित करता है और खासतौर पर बारिश या बूंदाबांदी के समय यह अधिक फैलता है। इस रोग से बचाव के लिए निम्नलिखित फफूंदनाशकों का छिड़काव करें:
🔹घुलनशील सल्फर
🔹कार्बेन्डाजिम
🔹हेक्साकोनाजोल
इसके अलावा, छिड़काव के घोल में एक स्टिकर मिलाने की सलाह दी जाती है ताकि दवा का प्रभाव अधिक समय तक बना रहे और कीटों से प्रभावी बचाव हो सके।
आम के बौर और मंजरों पर मधुआ और दहिया कीटों का हमला फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर उचित कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव करके इन कीटों और रोगों से बचा जा सकता है। आम के बागों की नियमित निगरानी और सही समय पर उपचार से बेहतर उत्पादन और उच्च गुणवत्ता के फल प्राप्त किए जा सकते हैं।
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