सैटेलाइट के बारे में हम में से कई लोग जानते होंगे, जिसे भारत मे कृत्रिम उपग्रह कहा जाता है। सामान्य रूप में कहें इसके माध्यम से किसी संचार प्रक्रिया को करने व जानने में मुश्किल नही होती है दूसरे शब्द में जैसे चंद्रमा पृथ्वी के चारो तरफ चक्कर लगाता है और इसे natural सैटेलाइट का नाम दिया जाता है वैसे ही यह आर्टिफिशियल सैटेलाइट है जो वैज्ञानिकों द्वारा संचार को सुगम बनाने के लिए बनाया गया है।पहला कृत्रिम उपग्रह 4 अक्टूबर 1957 को पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया था।
आपको शायद पता न हो , लेकिन अंतरिक्ष मे भेजे जाने वाले कोई भी सैटेलाइट को सोने की परत में लपेटा जाता है। जिसे MULTI INSULATION कहा जाता है।
सोने की परत क्यों चढ़ाई जाती है
वैज्ञानिकों के अनुसार सोने की परत सैटेलाइट की परिवर्तनशीलता , चालकता और जंग के प्रतिरोध को रोकने का काम करता है। ऐसे में अगर सैटेलाइट पर सोने या अन्य धातुओं की परत न चढ़ाए तो , अन्तरिक्ष में स्थित खतरनाक रेडीएशन satellite को पलभर में खत्म कर देंगे, जिसके कारण इसपर सोने या अन्य धातुओं की परत चढ़ाई जाती है।
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