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RBI क्या है और इसकी स्थापना क्यों हुई?

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है, जिसकी स्थापना 1935 में हिल्टन-यंग कमीशन की सिफारिश पर की गई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य है—पैसे की स्थिरता बनाए रखना, यानी रुपये की कीमत को स्थिर रखना ताकि महंगाई काबू में रहे। शुरू में इसका मुख्यालय कोलकाता में था, जिसे 1937 में मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। 1949 में RBI को पूरी तरह भारत सरकार के अधीन कर दिया गया।

RBI के मुख्य उद्देश्य

  • मुद्रा की स्थिरता बनाए रखना: ताकि जनता के लिए चीजें सस्ती बनी रहें।
  • आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना: बैंकों और वित्तीय संस्थानों को नियंत्रित करके।
  • वित्तीय स्थिरता: ताकि बैंकों में जनता का पैसा सुरक्षित रहे।

RBI मौद्रिक नीति को कैसे नियंत्रित करता है?

मौद्रिक नीति क्या होती है?

मौद्रिक नीति वह प्रक्रिया है, जिसके तहत RBI देश में पैसों की मात्रा, ब्याज दरों और उधारी को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास को संतुलित करना है।

लचीली महंगाई लक्ष्य प्रणाली (Flexible Inflation Targeting)

2016 से RBI ने 4% महंगाई लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 2% कम या ज्यादा की गुंजाइश होती है (यानी 2% से 6% तक की सीमा)।

मौद्रिक नीति के प्रमुख उपकरण

  • रेपो रेट: जिस दर पर RBI बैंकों को उधार देता है।
  • रिवर्स रेपो रेट: जिस दर पर RBI बैंकों से पैसा लेता है।
  • CRR और SLR: बैंक जमा का नियत हिस्सा जिसे रिज़र्व और सुरक्षित संपत्ति के रूप में रखा जाता है।
  • LAF और MSF: बैंकों को अल्पकालिक उधार देने की सुविधाएं।
  • बैंक रेट, OMOs और MSS: मौद्रिक नियंत्रण के अन्य प्रभावी साधन।

मौद्रिक नीति समिति (MPC): RBI का निर्णय लेने वाला मंच

MPC क्या है?

यह 6 सदस्यों वाली समिति है जिसे भारत सरकार ने 2016 में बनाया। इसका मुख्य कार्य रेपो रेट निर्धारित करना होता है। इसके निर्णय RBI के लिए बाध्यकारी होते हैं।

महंगाई पर MPC की भूमिका

  • सरकार और RBI मिलकर 5 साल के लिए महंगाई का लक्ष्य तय करते हैं।
  • यदि महंगाई लगातार 3 तिमाही तक सीमा से बाहर रहे, तो RBI को इसके कारण और समाधान बताने होते हैं।
  • हर छह महीने में RBI एक मौद्रिक नीति रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

RBI की आर्थिक पूंजी और उसका महत्व

आर्थिक पूंजी क्या है?

RBI की आर्थिक पूंजी में शामिल होते हैं—मूल धन, पुनर्मूल्यांकन शेष, जोखिम प्रावधान और रिज़र्व। पुनर्मूल्यांकन शेष सबसे बड़ा हिस्सा होता है (लगभग 73%) जिसमें विदेशी मुद्रा, सोने और ब्याज दरों से जुड़े लाभ-हानि आते हैं।

क्यों है ये पूंजी जरूरी?

  • जोखिम से सुरक्षा: जैसे मुद्रा अवमूल्यन या ब्याज दरों में भारी बदलाव।
  • नीति की विश्वसनीयता: मजबूत पूंजी RBI को अधिक प्रभावी बनाती है।
  • विश्वास और स्थिरता: जनता और सरकार का भरोसा मजबूत होता है।

RBI सरकार को अपना मुनाफा क्यों देता है?

RBI भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व वाला संगठन है। इसलिए RBI हर साल अपने अधिशेष (Surplus) का बड़ा हिस्सा सरकार को सौंपता है। इसे डिविडेंड कहा जाता है, जो सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का बड़ा स्रोत होता है।

उदाहरण:

  • वर्ष 2023-24 में: ₹2.11 लाख करोड़
  • वर्ष 2024-25 में: ₹2.69 लाख करोड़

इस अधिशेष का निर्णय RBI के केंद्रीय बोर्ड की मंजूरी के बाद लिया जाता है।

RBI की बैलेंस शीट और उसकी संरचना

RBI की बैलेंस शीट दो विभागों में विभाजित होती है:

इश्यू डिपार्टमेंट

  • दायित्व: चलन में नोट और बैंकों के पास नोट।
  • संपत्ति: सोना, विदेशी प्रतिभूतियां, सरकारी बॉन्ड।

बैंकिंग डिपार्टमेंट

  • दायित्व: पूंजी, जमा राशि, अन्य देनदारियां।
  • संपत्ति: सरकार को ऋण, बैंकों को ऋण, सरकारी बॉन्ड।

इस बैलेंस शीट से पता चलता है कि RBI कैसे सरकार और बैंकों के साथ अपने संबंधों का प्रबंधन करता है।

RBI को कौन-कौन से जोखिम झेलने पड़ते हैं?

  • बाजार जोखिम: मुद्रा, ब्याज और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
  • क्रेडिट जोखिम: उधारकर्ता द्वारा ऋण न लौटाना।
  • परिचालन जोखिम: तकनीकी या प्रोसेस से जुड़ी समस्याएं।
  • आकस्मिक जोखिम: वित्तीय या वैश्विक संकट।

इन जोखिमों से निपटने के लिए RBI “स्ट्रेस्ड-वैल्यू एट रिस्क” जैसे उन्नत मॉडल अपनाता है।

सरकार और RBI का संबंध: समय के साथ कैसे बदला?

प्रारंभिक दौर (1935–1950)

RBI ने वित्तीय संस्थाओं को स्थापित करने और सरकार को ऋण उपलब्ध कराने में मदद की।

सामाजिक नियंत्रण चरण (1970–1990)

RBI ने सरकार के घाटे को पूरा करने के लिए “एड हॉक ट्रेज़री बिल्स” जारी किए, जिससे RBI की स्वायत्तता प्रभावित हुई।

वित्तीय उदारीकरण (1991 से अब तक)

RBI ने सरकार को सीधे फंड देना बंद कर दिया। 2003 के FRBM Act के बाद RBI की मौद्रिक नीति और अधिक स्वतंत्र हुई।

निष्कर्ष

RBI केवल एक केंद्रीय बैंक नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक रीढ़ है। महंगाई नियंत्रण, आर्थिक स्थिरता और सरकार को फंडिंग देना—all-in-one जिम्मेदारी है इसकी। इसका अधिशेष सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करता है, वहीं इसकी मौद्रिक नीति भारत की आर्थिक दिशा को तय करती है।

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