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सावन के महीने में जब मॉनसून अपनी रफ्तार पकड़ लेता है, तब किसानों के लिए खेती का सुनहरा अवसर आता है। खासतौर पर खरीफ सीजन की दाल वाली फसलें जैसे अरहर (तुअर) इस समय अधिक लाभ देने वाली फसलों में मानी जाती हैं। यदि किसान इस समय पर सही किस्म की अरहर चुनें, तो वे कम समय और कम लागत में बेहतर उपज हासिल कर सकते हैं।

अरहर की ये 5 बेहतरीन किस्में: कम समय में ज़्यादा उत्पादन

देश के प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों ने अरहर की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जो न केवल तेज़ी से पकती हैं, बल्कि रोगों से भी लड़ने में सक्षम हैं। आइए जानें उन 5 बेहतरीन किस्मों के बारे में:

पूसा अरहर-16 (Pusa Arhar-16): जल्दी पकने वाली किस्म

यह अरहर की अगेती किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने विकसित किया है।

  • बुवाई का समय: जुलाई माह
  • पकने की अवधि: 120 दिन
  • विशेषता: पौधा छोटा, दाना मोटा
  • औसत उत्पादन: लगभग 1 टन प्रति हेक्टेयर
    यह किस्म कम समय में फसल देने वाली किसानों की पहली पसंद बन रही है।

टीएस-3आर (TS-3R): रोग प्रतिरोधक देर से पकने वाली किस्म

यह किस्म मॉनसून के बाद बुवाई के लिए उपयुक्त है और पकने में थोड़ा अधिक समय लेती है।

  • पकने की अवधि: 150 से 170 दिन
  • बीमारियों से सुरक्षा: विल्ट और मोज़ेक वायरस से प्रतिरोधक
  • औसत उत्पादन: लगभग 1 टन प्रति हेक्टेयर
    यह किस्म लंबे समय की खेती के लिए सुरक्षित और उपज में स्थिरता देने वाली मानी जाती है।

पूसा 992 (Pusa 992): उत्तरी राज्यों के लिए आदर्श

यह किस्म खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान के लिए उपयुक्त है।

  • पकने की अवधि: 120 से 140 दिन
  • दाने की विशेषता: भूरे रंग के, मोटे और चमकदार
  • उपज: प्रति एकड़ 6 क्विंटल तक
    यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो रही है।

आईपीए 203 (IPA 203): रोग प्रतिरोधक उन्नत किस्म

इस किस्म को विभिन्न रोगों से लड़ने के लिए विकसित किया गया है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है।

  • बुवाई का समय: जून माह
  • औसत उत्पादन: 18-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
    यह किस्म लंबी अवधि की सुरक्षा और अच्छी उपज दोनों देती है।

आईसीपीएल 87 (ICPL 87): घने गुच्छों में फलियां

इस किस्म के पौधे छोटे होते हैं लेकिन फलियां घने गुच्छों में और मोटी होती हैं।

  • पकने की अवधि: 130 से 150 दिन
  • उपज: 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
    यह किस्म कम जगह में अधिक उत्पादन देने के लिए उपयुक्त है।

निष्कर्ष: सही किस्म = अधिक उपज + अधिक लाभ

अरहर की इन उन्नत किस्मों को मॉनसून के दौरान अपनाकर किसान कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर लाभ कमा सकते हैं। साथ ही ये किस्में रोग प्रतिरोधक भी हैं, जिससे फसल की सुरक्षा और लागत में कमी दोनों सुनिश्चित होती हैं।

किसान अपनी क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करें और सावन में बुवाई कर भरपूर मुनाफा उठाएं।

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